पुलिस कई बिंदुओं पर कर रही है जांच
मधेपुरा : बबलू यादव साहुगढ दिवानी टोला का रहने वाला था. तीन भाइयों में सबसे बड़ा बबलू था. बबलू की मौत के बाद उसके परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. एक पुत्र व एक पुत्री के पिता बबलू की पत्नी का नौवां महीना चल रहा है. शीघ्र ही उसके घर तीसरे संतान का जन्म होना था. पूरे घर में बबलू की मौत से कोहराम मचा हुआ था. बबलू की पत्नी गुड़िया देवी बार बार गश खा कर बेहोश हो रही थी.
इन बिंदुओं पर हो सकती है. बबलू सरपंच के सहयोग से लगातार डेढ वर्ष से ग्रामीण पंचायत करवाता था.
अपने स्पष्ट फैसले तथा मजबूती से उसे लागू कराने इंसाफ के साथ खड़े होने की आदत ने गांव के कई पुराने लोगों के आंख की किरकिरी बना दिया था. ऐसे लोगों के बीच बबलू की बढती लोकप्रियता से खलबली थी. वहीं 1976 में बबलू के चाचा भूपेंद्र यादव की पीट पीट कर उपेंद्र पहलवान द्वारा हत्या कर दी गयी. इस मामले में उपेंद्र को उम्र कैद की सजा सुनाई गयी.
जेल से उपेंद्र सात दिन पूर्व मां के श्राद्ध के लिये पैरोल पर निकला था. परिजनों के अनुसार बबलू ने साहुगढ के जयकिशोर यादव एवं नीतीश कुमार से डेढ लाख की राशि में दो पुराना वृक्ष खरीदा था. इस पैसा का भुगतान करने के बाद जब बबलू वृक्ष कटाने गया तो जय किशोर यादव के भाई व नीतीश के पिता दीपनारायण यादव ने उक्त वृक्षों को निजी बताते हुए काटने से रोक दिया. इस मामले में थाना में आवेदन देकर दीपनारायण यादव द्वारा उसे रोका गया. इसके बाद बबलू ने पैसा वापसी के लिए तगादा शुरू किया. लेकिन नीतीश व जयकिशोर टाल मटोल करते रहे. बबलू के परिजन इन्हीं घटनाओं को बबलू की हत्या से जोड़ रहे हैं.
बबलू यादव के हत्या के मामले में पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है. मृतक का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है. वहीं वैज्ञानिक अनुसंधान भी जारी है. हत्या में संलिप्त अपराधियों को बख्शा नहीं जायेगा. परिजनों से बातचीत में भी कई बिंदु उभर कर सामने आई हैं. बहरहाल अनुसंधान जारी है. शीघ्र ही अपराधी सलाखों के पीछें होंगे.
राजेश कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक, मधेपुरा
