मुंगेर : ऐतिहासिक नगरी मुंगेर को स्मार्ट बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हो गयी है. प्रमंडलीय आयुक्त ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक तैयारी के निर्देश भी दिये हैं. लेकिन स्मार्ट सिटी के लिए हर किसी को ईमानदार प्रयास करना होगा. खुबसूरत शहर मुंगेर में आज न तो आम शहरी को शुद्ध पेयजल मिल रहा है और न ही बेहतर स्वास्थ्य व यातायात की व्यवस्था. शहर कूड़ों के ढेर पर दिखता है और विकास में पूरी तरह भेदभाव.
स्मार्ट सिटी के लिए करनी होगी तैयारी, राह में हैं कई रोड़े
मुंगेर : ऐतिहासिक नगरी मुंगेर को स्मार्ट बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हो गयी है. प्रमंडलीय आयुक्त ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक तैयारी के निर्देश भी दिये हैं. लेकिन स्मार्ट सिटी के लिए हर किसी को ईमानदार प्रयास करना होगा. खुबसूरत शहर मुंगेर में आज न तो आम […]

भागीरथी के तट पर स्थित मुंगेर ऐतिहासिक, आध्यात्मिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से समृद्ध रहा है. मुंगेर कभी महाभारतकालीन दानवीर राजा कर्ण की दानभूमि रही तो मुगलकाल में मीर कासिम ने मुंगेर को अपना राजधानी बनाया. आध्यात्मिक दृष्टिकोण से नगर देवी चंडिका स्थान, सीताकुंड, सीताचरण व कष्टहरणी घाट लोगों को आकर्षित करता रहा है. वहीं जमालपुर रेल कारखाना, आइटीसी व बंदूक कारखाना मुंगेर को आर्थिक दृष्टिकोण से संबल प्रदान करता रहा. लेकिन आजादी के बाद विकास के दौर में मुंगेर पिछड़ गया और यह नगरी विकास से दूर होता चला गया. शहर के लोगों को सामान्य नागरिक सुविधा शुद्ध पेयजल, बेहतर चिकित्सा एवं टाउनशिप का लाभ नहीं मिल रहा.
स्मार्ट बनाने की तैयारी
गत वर्ष केंद्र सरकार ने जब देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की और इसके चयन के लिए निर्धारित मापदंड के अनुरूप रिपोर्ट मांगा तो नगर निगम मुंगेर रिपोर्ट देने में ही पिछड़ गया. समय पर नगर निगम प्रशासन ने राज्य के नगर विकास एवं आवास विभाग को अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी. फलत: मुंगेर स्मार्ट सिटी के दौर में शामिल ही नहीं हो पाया. मुंगेर के प्रमंडलीय आयुक्त नवीन चंद्र झा के पहल पर पुन: मुंगेर को स्मार्ट सिटी के दौर में शामिल करने के लिए प्रशासनिक तैयारी प्रारंभ की गयी है. शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, पीएचइडी, विद्युत विभाग को आवश्यक दायित्व सौंपे गये हैं. ताकि नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जा सके और शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाते हुए मुंगेर को स्मार्ट बनाया जाये.
ईमानदार प्रयास जरूरी
मुंगेर को स्मार्ट बनाने के लिए ईमानदार प्रयास की जरूरत है. सभी विभागों, संगठनों एवं आम लोगों को अपने-अपने दायित्व का सही ढंग से निर्वहन करना होगा. भेदभाव रहित विकास की रूपरेखा बनाना होगा. ताकि शहर का समग्र विकास हो सके. मुंगेर शहर में हाई मास्ट या एलइडी लाइट लगाने का मामला हो या फिर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की. सबों में भेदभाव किया जाता रहा है. यहां तक कि जिस पूअर हाउस दो नंबर गुमटी के नाम से शहरी पीएचसी खोला गया उसे दूसरे वार्ड में स्लम एरिया से दूर पॉश इलाके में खोल दिया गया. सदर अस्पताल से आधे किलोमीटर की दूरी पर चारों पीएचसी खोल दिये गये. जबकि शहर का दक्षिणी इलाका पूरी तरह इससे वंचित रहा.
मुश्किल होगा सफर
मुंगेर शहर को स्मार्ट बनाने के लिए शहरवासियों को शुद्ध पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट, ड्रेनेज सिस्टम, इंटेलीजेंस ट्रैफिक मैनेजमेंट, टेली मेडिसीन व टेली एजुकेशन, राजस्व संग्रह जैसे कुछ महत्वपूर्ण मापदंड जरूरी है. जिसमें अधिकांश व्यवस्था में मुंगेर नगर निगम पूरी तरह फिसड्डी स्थिति में है.
बदहाल शिक्षा: शिक्षा का हाल बदहाल है. अधिकांश स्कूल व कॉलेज में शिक्षकों की कमी है. फलत: कॉलेज में अब छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए ही नहीं पहुंच रहे. पंजीयन व फॉर्म भरने के समय ही कॉलेजों में विद्यार्थियों की भीड़ लगती है. मुंगेर शहर के जिला स्कूल, मॉडल स्कूल, टाउन स्कूल में कंप्यूटर की पढ़ाई नहीं हो रही और लाखों के कंप्यूटर पर धूल जमा है. जबकि व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई भी नहीं हो रही.
कचरा निस्तारण : सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट के तहत शहर में नगर निगम व आइटीसी की ओर से डोर टू डोर कचरा उठाव की व्यवस्था की गयी है. किंतु यह व्यवस्था भी कुछ ही घरों तक सीमित है. मुहल्ले में घुमने वाला टीपर कुछ निर्धारित घरों से ही कूड़े का संग्रह करता है. दूसरी ओर सरकार के लाख निर्देश के बावजूद नगर निगम के ट्रैक्टर, टीपर व जेसीबी में जीपीएस सिस्टम नहीं लगाया गया है.
खराब सड़कें : किसी भी शहर की पहचान स्वच्छता से होती है. सड़कें साफ व सुंदर हो. यह हर किसी को भाता हैं. लेकिन मुंगेर शहर की सड़कों पर चारों ओर कूड़े ही कूड़े नजर आते हैं. वीआइपी इलाका किला क्षेत्र छोड़ कर शहर के मुख्य बाजार हो या मुहल्लों की गलियां, कूड़ों का ढेर मुंगेर की पहचान बना दी गयी है. शहर के मध्य स्थित एक मात्र पार्क नंदकुमार पार्क, एसबीआइ बाजार ब्रांच, टैक्सी स्टैंड, शास्त्री चौक, जुबली वेल चौक, शादीपुर, मोगल बाजार बर गाछ, बड़ी बाजार राजबटी, जामा मसजिद रोड अघोषित डंपिंग यार्ड बन गया है.