जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्थानांतरण निरस्त के आदेश का किया स्वागत
मुंगेर : मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ द्वारा सरकारी मापदंडों के विपरीत तथा अनियिमता के तहत की गयी 73 जीएनएम व एएनएम के स्थानांतरण को स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख (नर्सिंग) डॉ आरडी रंजन ने निरस्त कर दिया है. विदित हो कि 30 जून 2016 को सिविल सर्जन ने 73 एएनएम व जीएनएम को मनमाने तरीके से जिले भर में स्थानांतरित किया था. उस स्थानांतरण को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों में भारी रोष व्याप्त था और कर्मचारी संघ ने सिविल सर्जन पर कई गंभीर आरोप लगाये थे.
जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने किया था विरोध : बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ शाखा मुंगेर द्वारा सिविल सर्जन के इस स्थानांतरण का जमकर विरोध किया गया था. कर्मचारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय से लेकर आयुक्त कार्यालय तक का घेराव किया था और अस्पताल से लेकर सड़क तक आंदोलन चलाया. संघ ने सिविल सर्जन आरोप लगाया था कि पैसे और पैरवी का खेल इस स्थानांतरण में चला है. जबकि नियमों को ताख पर रख कर 73 स्वास्थ्य कर्मियों का स्थानांतरण किया गया है.
लगातार आंदोलन के कारण आरडीडी स्वास्थ्य ने इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग पटना को कर्मचारियों के मांगों का पत्र भेज कर जांच कराने की बात कही थी.
निदेशक प्रमुख ने स्थानांतरण पर लगायी रोक : स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख (नर्सिंग) डॉ आरडी रंजन ने 11 नवंबर को जारी अपने आदेश में सिविल सर्जन के स्थानांतरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया. उन्होंने अपने आदेश में कहा है कि सरकार द्वारा निर्गत आदेशों की अवहेलना एंव बरती गयी घोर अनियमितता के कारण सिविल सर्जन मुंगेर के कार्यालय आदेश सह पठित ज्ञापंक-1399 दिनांक 30.6.2016 द्वारा जीएनएम व एनएम के कुल 73 कर्मियों के किये गये स्थानांतरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है.
स्वास्थ्य प्रमुख के इस निर्णय के बाद पिछले जून 2016 में स्थानांतरित सभी जीएनएम व एएनएम को अब अपने पूर्व के पदस्थापन स्थल पर लौटना होगा.
संघ ने किया स्वागत : बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ शाखा मुंगेर के संयोजक सुरेंद्र कुमार, कोषाध्यक्ष राजेश मेहता, कामेश्वरी देवी, समीर कुमार सहित अन्य ने स्थानांतरण को निरस्त करने पर प्रसन्नता व्यक्त किया है. संघ ने कहा कि मनमाने तरीके से किये गये इस स्थानांतरण का संघ शुरु से ही विरोध कर रही थी और इसके लिए अस्पताल से सड़क तक आंदोलन किया गया. निदेशक प्रमुख का निर्णय स्वास्थ्यकर्मियों के हित में है.
