बीमा दुर्घटना के 32 लाख का भुगतान

लोक अदालत. एक हजार से अधिक वादों का हुआ निष्पादन व्यवहार न्यायालय मुंगेर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. इसमें आपसी सुलह व समझौते के आधार पर लगभग एक हजार से अधिक वादों का निष्पादन किया गया. साथ ही मोटर बीमा दुर्घटना के अंतर्गत लाभार्थियों को 32 लाख रुपये से अधिक […]

लोक अदालत. एक हजार से अधिक वादों का हुआ निष्पादन

व्यवहार न्यायालय मुंगेर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. इसमें आपसी सुलह व समझौते के आधार पर लगभग एक हजार से अधिक वादों का निष्पादन किया गया. साथ ही मोटर बीमा दुर्घटना के अंतर्गत लाभार्थियों को 32 लाख रुपये से अधिक का चेक दिया गया.
मुंगेर : लोक अदालत का उद‍्घाटन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुषमा सिन्हा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. मौके पर अपर समाहर्ता ईश्वर चंद्र शर्मा सहित अनेक अपर सत्र न्यायाधीश मौजूद थे.
न्यायालय परिसर के एडीआर भवन में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का उद‍्घाटन करते हुए जिला जज ने कहा कि उच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार इस राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया है. जिसकी सफलता को लेकर सरकारी विभाग के पदाधिकारी, बैंक प्रबंधन, बीमा कंपनी व अधिवक्ताओं का सम्मिलित प्रयास रहा है.
अधिक से अधिक वादों को लोक अदालत के माध्यम से निबटाना हमारी प्राथमिकता है. मौके पर ओरिएंटल इंश्यूरेंस कंपनी की ओर से मोटर बीमा दुर्घटना क्लेम के तहत सरिता देवी को 2 लाख 88 हजार 900 एवं मो. नजरुद्दीन को 2 लाख 31 हजार 514 रुपये का चेक जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने प्रदान किया. इस अवसर पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीसी चौधरी ने लोक अदालत की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से समझौते के आधार पर मामलों का निष्पादन किया जा रहा है.
इसके लिए आज के राष्ट्रीय लोक अदालत में 12 बेंचों का गठन किया गया. जिसमें दोनों पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से फौजदारी, पारिवारिक वाद, श्रम वाद, वाहन दुर्घटना, बैंक ऋण, राजस्व, मनरेगा, बिजली जैसे विवादों का निबटारा किया गया. कार्यक्रम का संचालन जहां जनसंपर्क उपनिदेशक केके उपाध्याय ने किया. वहीं अपर जिला सत्र न्यायाधीश ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया.
दीप प्रज्ज्वलित कर उद‍्घाटन करतीं जिला एवं सत्र न्यायाधीश व वादों की सुनवाई करते न्यायिक पदाधिकारी.

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