आठ माह से रिफिलिंग नहीं सदर अस्पताल. फायर सेफ्टी गैस टैंक नहीं रहा काम का

सदर अस्पताल मुंगेर में फायर सेफ्टी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है. अस्पताल परिसर के विभिन्न वार्डों में फायर सेफ्टी संयंत्र तो लगे हैं, पर ये आग बुझाने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि उस संयंत्र में गैस रिफिलिंग की तिथि आठ माह पूर्व ही खत्म हो चुकी है. यदि कभी आग से आपात स्थिति उत्पन्न […]

सदर अस्पताल मुंगेर में फायर सेफ्टी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है. अस्पताल परिसर के विभिन्न वार्डों में फायर सेफ्टी संयंत्र तो लगे हैं, पर ये आग बुझाने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि उस संयंत्र में गैस रिफिलिंग की तिथि आठ माह पूर्व ही खत्म हो चुकी है. यदि कभी आग से आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो यहां जान-माल की क्षति से इनकार नहीं किया जा सकता. बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन मूकदर्शक बना है.

मुंगेर : भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में एक सप्ताह पूर्व आग लगने से 20 रोगियों की झुलस कर मौत हो गयी. यह हृदय विदारक घटना सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों के लिए एलार्मिंग है. बावजूद निजी व सरकारी अस्पताल आग से निबटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. मुंगेर सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से लेकर एसएनएसीयू व अन्य वार्डों में फायर सेफ्टी संयंत्र तो लगे हैं. लेकिन वह महज शोभा की वस्तु बनी हुई है. अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण उसका समय से रीफिलिंग नहीं किया गया है और वह संयंत्र वर्तमान में आग बुझाने में सक्षम नहीं है.
बनी रहती है अगलगी की आशंका: सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड, जांच घर, ओपीडी सेवा, दवा वितरण केंद्र, उपाधीक्षक कार्यालय, प्रसव केंद्र सहित अन्य वार्डों में लगभग 35 फायर सेफ्टी मशीन लगे हैं. कितु सबके सब महज शोभा की वस्तु बनी हुई है़ उक्त स्थानों पर प्राय: बिजली के शॉटसर्किट की संभावनाएं बनी रहती है़ जो कभी भी अगलगी की बड़ी घटना का रूप धारण कर सकती है़ मालूम हो कि पिछले महीने अस्पताल उपाधीक्षक कार्यालय में शॉटसर्किट की घटना घटी थी़ किंतु तत्क्षण ही बिजली कट जाने के कारण एक बड़ी वारदात नहीं हो पायी. बावजूद अस्प्ताल प्रबंधन फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर नहीं है.
दोहरा सकता है भुवनेश्वर का हादसा: प्रबंधन द्वारा फायर सेफ्टी के मामले को गंभीरता से नहीं लेना अस्पताल के लिए खतरनाक साबित हो सकता है़ मालूम हो कि 17 अक्तूबर की देर रात उड़ीसा के भुवनेश्वर स्थित एक निजी अस्पताल के डायलेसिस सेंटर व आइसीयू में बिजली के शॉटसर्किट से आग लग गयी थी. जिसमें अस्पताल में भरती 20 रोगियों की झुलस कर मौत हो गयी. जो देश के सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों के लिए एलार्मिंग स्थिति है.
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि उसके रीफिलिंग की तिथि खत्म हो चुकी है. वे शीघ्र इसके रीफिलिंग के लिए अस्पताल प्रबंधक से बात करेंगे़
23 फरवरी को होनी थी रिफिलिंग
पिछले आठ माह से सदर अस्पताल में फायर सेफ्टी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है़ जिसके कारण अस्पताल में संभावित अगलगी की घटना को लेकर 24 घंटे खतरा बनी रहती है. अस्पताल के विभिन्न विभागों एवं वार्डों में लगे फायर सेफ्टी संयंत्र को 24 फरवरी 2015 को रीफिलिंग किया गया था. पटना के मीनेक्स फायर सिक्यूरिटी एजेंसी द्वारा रीफिलिंग के बाद 23 अगस्त 2015 को इसका इंस्पेक्शन भी किया गया. इसके पुन: रीफिलिंग की तिथि 23 फरवरी 2016 को निर्धारित था.
लेकिन अस्पताल प्रबंधन की बदहाली के कारण इसे रीफिलिंग नहीं किया गया है और पिछले आठ माह से बिना फायर सेफ्टी के ही सदर अस्पताल की व्यवस्था चल रही है. इतना ही नहीं अस्पताल के कर्मचारियों व स्वास्थ्यकर्मियों को इस संयंत्र के प्रयोग का भी प्रशिक्षण नहीं है. फलत: आपात स्थिति में यह संयंत्र हाथी का दांत ही साबित होगा.

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