डेढ़ वर्ष पहले सदर अस्पताल में प्रारंभ हुआ था आइसीयू
मुंगेर : इलाज के लिए सदर अस्पताल आने वाले मरीजों के नाम पर यहां महज खानापूर्ति की जाती है़ छोटी-छोटी दुर्घटना व अन्य मामलों में चिकित्सक यहां मात्र प्राथमिक उपचार कर सीधे पीड़ित को रेफर की परची थमा देते हैं. इसके कारण समय पर समुचित इलाज नहीं मिलने पर कई बार मरीजों की मौत तक हो चुकी है़
स्वास्थ्य के मामले में पिछड़ रहा मुंगेर
जिले में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए न सिर्फ यहां के स्थानीय नेता, बल्कि राज्य की सरकारें भी बड़े-बड़े दावे कर चुकी है, पर शायद उन्हें सदर अस्पताल में उपलब्ध मौजूदा चिकित्सा व्यवस्था के बारे में पता ही नहीं है़ 2007 में 10 मार्च को राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने विकास यात्रा के दौरान पोलो मैदान में एक सभा की थी़ उसी मंच से तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव ने यह घोषणा की था कि सदर अस्पताल 300 बेड वाला अस्पताल बनेगा. पर सुशासन सरकार की यह घोषणा पिछले आठ वर्षों में पूरी नहीं हो पायी है.
35 लाख की लागत से बना था आइसीयू
27 फरवरी 2015 को जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने लगभग 35 लाख रुपये की लागत से बने आइसीयू का विधिवत उद्घाटन किया था़ इसके बाद जिलेवासियों को यह आस जग गयी थी कि अब उन्हें गंभीर इलाज के लिए जिले से बाहर नहीं जाना पड़ेगा़ पर स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण डेढ़ साल के भीतर जहां एक भी मरीज को यहां भरती नहीं किया गया़ वहीं अब आइसीयू के अस्तित्व को ही खत्म कर दिया गया है़
जिस आइसीयू कक्ष में मरीजों के इलाज के लिए बेड, एंक्यूवेटर व मॉनिटर लगे हुए थे़ उसे हटा कर स्टोर में रख दिया गया तथा उस कक्ष में एसएनसीयू का विस्तार कर दिया गया़ जब तक आइसीयू में उपकरण लगे हुए थे, तब तक लोगों को कम से कम यह आस बंधी हुई थी कि उन्हें अपने ही जिले में इसकी सुविधा मिलेगी़ पर अब तो जिलेवासियों का वह आस भी टूट गयी.
डायलेशन की नहीं हो पायी व्यवस्था
मुंगेर जिले से अलग हुए खगड़िया व बेगूसराय सहित अन्यजिलों के सदर अस्पताल में डायलेशन की व्यवस्था काफी पहले से की जा चुकी है़ पर मुंगेर के सदर अस्पताल में आज तक डायलेशन की व्यवस्था नहीं हो पाना यहां के स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता को जाहिर करती है़ जिले में यदि डायलेशन की व्यवस्था हो जाती तो यहां के लोगों को इसके लिए निजी क्लिनिकों में हजारों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही बाहर जाना पड़ेगा़ इसके लिए प्रमंडलीय आयुक्त नवीन चंद्र झा ने भी दो माह पूर्व अस्पताल निरीक्षण के दौरान आवश्यक निर्देश भी दिये थे. लेकिन इस पर अबतक अमल नहीं हो पाया है.
