बदहाली. डेंगू के इलाज को तैयार नहीं सदर अस्पताल
एक ओर जहां जिले के विभिन्न क्षेत्रों में डेंगू व चिकनगुनियां जैसी गंभीर रोग से लोग दहशत में हैं. वहीं दूसरी ओर सदर अस्पताल में अब तक चिकनगुनियां का जांच किट तक उपलब्ध नहीं हो पाया है और डेंगू वार्ड का संचालन भी नहीं हो पाया है.
मुंगेर : सदर अस्पताल प्रबंधन डेंगू व चिकनगुनिया के मरीजों के इलाज को लेकर उदासीन बना हुआ है़ हाल यह है कि इसके कारण इलाज के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों को सामान्य मरीजों के साथ ही भरती किया जा रहा है़ इससे अन्य मरीजों में भी डेंगू व चिकनगुनियां जैसी खतरनाक बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ गया है़ जब तक चिकनगुनियां के मरीज मुंगेर तक नहीं पहुंचे थे़, तब तक इसके लिए जांच किट की कोई खास आवश्यकता नहीं थी, पर एक अक्टूबर को हवेली खड़गपुर प्रखंड के भदौरा गांव में चिकनगुनियां के मरीज पाये जाने के 15 दिनों बाद भी सदर अस्पताल में जांच किट की व्यवस्था नहीं हो पायी है़
वहीं जांच घर में डेंगू के भी अब मात्र 8 जांच किट बचे हुए हैं. सदर अस्पताल की ऐसी तैयारी के बीच मरीजों को निजी जांच घरों में महंगी कीमत चुका कर कराने पड़ रहे हैं. शनिवार को धरहरा प्रखंड के बंगलवा गांव निवासी राजो मांझी की पत्नी
कौशल्या देवी को इलाज के लिए अस्पताल में भरती कराया गया़ उसे पिछले पांच महीने से बुखार था़ चिकित्सक ने डेंगू व मलेरिया की
संभावना जाहिर करते हुए उसे ब्लड जांच कराने को कहा़ किंतु जांच घर के कर्मी उसे यह कह कर जांच करने से मना कर दिये कि
जांच किट खत्म हो गया है़ इसके कारण उसे निजी जांच घर में जांच करना पड़ा, जिसके लिए उसे 400 रुपये का भुगतान भी करना पड़ा़
सुसज्जित नहीं हो पाया है डेंगू वार्ड
सदर अस्पताल के महिला विभाग में बनाये गये डेंगू वार्ड में महीनों से ताला लगा हुआ है़ वार्ड के भीतर न तो एक भी बेड लगा हुआ है और न ही छत में एक भी पंखे टंगे हैं. इसके कारण डेंगू व मलेरिया जैसे संक्रामक रोग से ग्रसित मरीजों का इलाज सामान्य मरीजों के साथ किया जा रहा है़ मरीजों को अस्पताल में मच्छरदानी तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जो इस तरह के संक्रामक बीमारी को और बढ़ाने का कारण बन सकता है़
