65 कमजोर नवजातों में 11 का हुआ इलाज
राहत शिविर में गंदगी के बीच रह रहे हैं नवजात व गर्भवती माताएं
स्वास्थ्य समिति उदासीन नवजात व गर्भवती महिलाएं हो रहीं बीमार
मुंगेर : बाढ़ के दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि वैसी गर्भवती माताएं जिनके प्रसव का समय काफी नजदीक हो तथा कमजोर नवजातों को अविलंब अस्पतालों में भरती कर आवश्यक चिकित्सकीय सेवा उपलब्ध कराया जाये़ किंतु इस संबंध में जिला स्वास्थ्य समिति काफी उदासीन बनी रही़ चिन्हित किये गये कुल 327 गर्भवती माताओं तथा कमजोर नवजातों में से मात्र 33 को ही इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया़
शिविरों की गंदगी पड़ सकती भारी
सर्वविदित है कि प्रशासनिक स्तर पर जितने भी राहत शिविर बनाये गये थे़ वहां पर बाढ़ पीड़ितों को गंदगी के बीच रहना मजबूरी बन गयी थी़ वैसे तो गंदगी के बीच रहना किसी के लिए भी बीमारियों को गले लगाने के बराबर माना जाता है, वहीं चिकित्सकों की मानें तो गर्भवती महिलाओं तथा कमजोर नवजातों को गंदगी के बीच रखना काफी जोखिम भरा होता है़ यह उनके स्वास्थ्य के लिए भारी पड़ सकता है़ बावजूद जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती माताओं तथा नवजातों को राहत शिविरों की गंदगी के बीच ही छोड़ दिया गया़
22 गर्भवती भरती, 65 नवजात िचह्नित हुए थे
जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा विभिन्न राहत शिविरों में रह रहे कुल 262 गर्भवती माताओं को चिन्हित किया गया, जिनके प्रसव की तिथि काफी नजदीक थी़ किंतु उनमें से मात्र 22 महिलाओं को ही स्थानीय पीएचसी व सदर अस्पताल में भरती कराया गया़ वहीं कुल 65 कमजोर नवजातों को भी चिन्हित किया गया़ जिनमें से मात्र 11 को इलाज के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में भरती कराया गया़
कहते हैं अधिकारी
प्रभारी सिविल सर्जन सह अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि इलाज के लिए भरती होने से मना कर देने के कारण चिन्हित किये गये बांकी गर्भवती माताओं व कमजोर नवजातों को भरती नहीं कराया जा सका़
