दर्जनों गांव अब भी हैं जलमग्न

जल प्रलय. मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से 46 सेंटीमीटर ऊपर बह रही मुंगेर : जिले में बाढ़ का विनाशकारी तांडव जारी है़ गंगा का जलस्तर अब भी मुंगेर में खतरे के निशान से 46 सेंटीमीटर ऊपर है़ दर्जनों गांव अब तक बाढ़ के पानी में पूरी तरह जलमग्न है़ं दियारा क्षेत्र का इलाका […]

जल प्रलय. मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से 46 सेंटीमीटर ऊपर बह रही

मुंगेर : जिले में बाढ़ का विनाशकारी तांडव जारी है़ गंगा का जलस्तर अब भी मुंगेर में खतरे के निशान से 46 सेंटीमीटर ऊपर है़ दर्जनों गांव अब तक बाढ़ के पानी में पूरी तरह जलमग्न है़ं दियारा क्षेत्र का इलाका सबसे अधिक प्रभावित है़ गंगा का जलस्तर पिछले चार दिनों से लगातार घट रहा है, लेकिन इसके घटने की रफ्तार काफी धीमी है़ जलप्रलय के बीच तीन लाख की आबादी जिंदगी और मौत से जूझ रही है. प्रशासनिक स्तर पर उपलब्ध करायी जा रही राहत सामग्री पीड़ितों के लिए नाकाफी है़ जानकारों की मानें तो हालत सुधरने में अभी एक पखवाड़ा का समय लगेगा.
पानी के बीच लल्लूपोखर गोढ़ी टोला.
39.79 मीटर पर पहुंचा गंगा का जलस्तर
गंगा का जलस्तर घटने की रफ्तार काफी धीमी है़ रविवार को दिन भर जहां प्रत्येक तीन घंटे में एक सेंटीमीटर की रफ्तार से जलस्तर में गिरावट हो रही थी वह शाम में घटकर प्रत्येक चार घंटे में एक सेंटीमीटर हो गया था़ लेकिन सोमवार की सुबह आठ बजे केंद्रीय जल आयोग द्वारा मिली रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर में फिर से प्रत्येक दो घंटे पर एक सेंटीमीटर की कमी होने लगी़ धीमी गति से जलस्तर में कमी आने के कारण अब भी गंगा खतरे के निशान से 46 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है़
निर्देशों में ही सिमटा है लंगड़ : तीन दिन पूर्व राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिलाधिकारी को निर्देश दे दिया है कि बाढ़ प्रभावित गांव के ही किसी ऊंचे स्थान पर लंगड़ चलाया जाये़ वहां स्थायी किचन की व्यवस्था कर पीड़ितों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाये़ लेकिन अब तक लंगड़ की व्यवस्था नहीं हो पायी है. प्रशासनिक स्तर पर अब तक 74 राहत शिविर का संचालन हो रहा है, जहां भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. इधर जिले के कुतलुपुर,
जाफरनगर, टीकारामपुर, झौवाबहियार व हरिणमार जैसी पंचायतों में अब भी हजारों लोग बाढ़ में गांव में ही फंसे हुए हैं. यहां अब तक पका भोजन भी उपलब्ध नहीं हो रहा है.
मंडरा रहा महामारी का खतरा : एक ओर जहां सिंह नक्षत्र की प्रचंड धूप की तपिश में बाढ़ पीड़ित झुलस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पीड़ितों के सामने शौच व पेयजल का संकट बरकरार है़ घटते जलस्तर के कारण जैसे- जैसे प्रभावित इलाकों से बाढ़ का पानी निकल रहा है, वैसे- वैसे वहां सड़ांध की स्थिति भी उत्पन्न हो गयी है़ जो व्यापक पैमाने पर महामारी का संकेत है़ ग्रामीण इलाके में तो चापाकल व कुआं अभी बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है़ इसके कारण उन्हें बहती गंगा का पानी ही सेवन करना पड़ रहा है, जो पूरी तरह दूषित है़
दर्जनों गांव अब तक बाढ़ के पानी में पूरी तरह जलमग्न, दियारा क्षेत्र का इलाका सबसे अधिक प्रभावित
गंगा का जलस्तर पिछले चार दिनों से लगातार घट रहा, लेकिन इसके घटने की रफ्तार है काफी धीमी
हालत सुधरने में अभी भी लग सकता है एक पखवाड़े का समय
एक ओर सिंह नक्षत्र की प्रचंड धूप की तपिश में झुलस रहे बाढ़ पीड़ित, वहीं पीड़ितों के सामने शौच व पेयजल का संकट भी है बरकरार

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