मुंगेर : सन 1976 के बाद पहली बार गंगा का जलस्तर मुंगेर में 40 मीटर से ऊपर पहुंच गया. दियारा से लेकर गंगा के तटवर्ती इलाके के गांव जहां जलमग्न हैं, वहीं मुंगेर शहरी क्षेत्र का बड़ा भू-भाग पानी में डूब गया है. मुंगेर जिले के बाहा चौकी से लेकर घोरघट तक के क्षेत्र में पानी ही पानी है. यहां जलस्तर बढ़ने से आधे दर्जन स्थानों पर पानी का बहाव राष्ट्रीय उच्च पथ 80 के ऊपर से हो रहा. फलत: आवागमन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों के बीच भोजन, पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है.
प्रशासनिक राहत शिविर नाकाफी : यूं तो जिला प्रशासन द्वारा अबतक 54 राहत शिविर खोले गये हैं. जहां लगभग 40 हजार लोग शरण लिये हुए हैं. जबकि प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले में ढाई लाख से अधिक लोग बाढ़ प्रभावित हैं. जाहिर है कि लगभग 80 प्रतिशत लोग प्रशासनिक राहत से अबतक दूर हैं. बड़ी संख्या में आज भी लोग दियारा क्षेत्र में पानी के बीच रह रहे. जिन्हें खाने के लिए मुट्ठी भर चुरा व गुड़ उपलब्ध कराया गया है. जो उनके लिए ऊंट के मुंह में जीरा का फोरन वाली स्थिति है. एसडीआरएफ की टीम दियारा क्षेत्र में प्रशासनिक चुरा-गुड़ के पैकेट को लेकर कुछ लोगों तक पहुंचा पा रही है.बाढ़ के पानी के बीच ढाई सौ गांव : मुंगेर जिले का ढाई सौ गांव बाढ़ के पानी के बीच है.
जहां आवागमन का एक मात्र साधन अब नाव बचा है. सड़क संपर्क भंग हो चुका है और लोगों का जनजीवन त्राहि-त्राहि कर रहा. मुंगेर सदर प्रखंड के कुतलुपुर, जाफरनगर, महुली, तौफिर, टीकारामपुर, मय, मिर्जापुर, बरदह, शीतलपुर, चड़ौन, डीह, सीताकुंड, महेशपुर, मनियारचक, फुलकिया, तारापुर दियारा एवं नौवागढ़ी का इलाका जहां बाढ़ की चपेट में है. वहीं बरियारपुर प्रखंड का कलारामपुर, नीरपुर, झरकहवा, उदयपुर, कल्याणपुर, एकाशी, रतनपुर, ऋषिकुंड, खड़िया, पीपरा, घोरघट, बंगाली टोला, महदेवा तथा जमालपुर प्रखंड का सिंधिया, पड़हम, फरदा, डकरा, सतखजुरिया, इंदरुख का इलाका पानी में डूबा है. धरहरा प्रखंड का हेमजापुर, बाहाचौकी, शिवकुंड, लगमा, दुर्गापुर एवं टाल क्षेत्र में पानी ही पानी है. वहीं खड़गपुर का अग्रहण, भदौड़ा, सठबिग्घी, बागेश्वरी, नाकी, लोहची, बहिरा का इलाका बाढ़ में डूबा हुआ है. इस क्षेत्र के लोग भोजन पानी के लिए तरस रहे हैं.
