अबतक मात्र 1100 लोगों में हैलोजन टैबलेट का वितरण
मुंगेर : जहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रशासनिक राहत शिविरों में 24 घंटे चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के दावे किये जा रहे. वहीं मुंगेर जिले के लगभग ढाई लाख बाढ़ पीड़ितों के लिए दो मेडिकल टीम गठित है. महज दो चलंत चिकित्सक दल द्वारा द्वारा कुल 49 शिविरों में रह रहे बाढ़ पीड़ित परिवारों एवं बाढ़ प्रभावित लोगों का इलाज की व्यवस्था की गयी है जो पूरी तरह नकाफी है. वहीं शिविर में रह रहे गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को देखने वाला कोई नहीं.
दो चिकित्सक दल के भरोसे 2.26 लाख पीड़ित . जिले में सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल 2 लाख 25 हजार 703 लोगों को बाढ़ प्रभावित के रूप में चिन्हित किया गया है़ राज्य स्वास्थ्य विभाग ने साफ निर्देश दिया है कि जितने भी राहत शविर चलाये जा रहे हैं वहां पर 24 घंटे चिकित्सकीय सेवा बहाल रहनी है़
किंतु जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर द्वारा महज दो चलंत चिकित्सक दल से ही काम चलाया जा रहा है़ चिकित्सकीय सेवा के नाम पर शिविरों दो या तीन पारा मेडिकल स्टाफों को प्रतिनियुक्त कर दिया गया है़ वह भी रात में गायब ही रहता है.
मात्र 1100 के बीच हुआ है दवा का वितरण . बाढ़ के दौरान प्रभावित इलाकों का पेयजल पूरी तरह दूषित हो गया है़ जिसके लिए सरकार ने प्रभावित इलाकों में हैलोजन टैबलेट वितरण करने का निर्देश दिया है़ किंतु जिला स्वास्थ्य समिति इस संबंध में पूरी तरह कछुए की चाल चल रही है़
स्वास्थ्य विभाग मुंगेर से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार तक मात्र 1100 व्यक्ति के बीच ही हैलोजेन टैबलेट का वितरण हो पाया है़ जबकि स्वास्थ्य विभाग ने 41 गांवों में महामारी फैलने की अंदेशा जतायी है़ मालूम हो कि जिला स्कूल में चल रहे राहत शिविर में गुरुवार को दूषित जल पीने के कारण ही उमेश साव की पत्नी रेखा देवी डायरिया की शिकार हो गयी़ जिसका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है़ इस प्रकार के मामले अन्य जगहों पर भी सामने आ रहे हैं.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने बताया कि जिले में मात्र 72 चिकित्सक पदस्थापित हैं. यदि सभी राहत शिविरों में चिकित्सक को प्रतिनियुक्त किया जायेगा तो वह भी पूरा नहीं हो पायेगा़ इसके अलावे सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल तथा विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी मरीजों की सेवा के लिए चिकित्सक जरूरी है़
