मुंगेर में गंगा नदी शनिवार को खतरे के निशान को पार कर गया. दोपहर बाद जलस्तर 39.38 सेंटीमीटर से ऊपर चला गया. यहां खतरे का निशान 39.33 सेंटीमीटर पर निर्धारित है.
मुंगेर : जिले में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते ही बाढ़ का कहर चारों ओर दिखाई देने लगा है. दियारा क्षेत्र में हजारों की संख्या में लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं जिसे निकालना अभी बांकी है. प्रशासनिक स्तर पर जो नाव की व्यवस्था की गयी है वह नकाफी है. मुंगेर शहरी क्षेत्र के शिवनगर चांयटोला, हेरूदियारा, मोकबीरा व महद्दीपुर मुहल्ले तक पानी से घिर गया है. जबकि गंगा से सटे क्षेत्र में बाढ़ ने तबाही मचानी शुरू कर दी है.
पिछले तीन वर्षों के बाद शनिवार को पहली बार मुंगेर में गंगा नदी खतरे के निशान को पार किया. इससे पूर्व वर्ष 2013 में खतरे के निशान से ऊपर गंगा का पानी बह रहा था. गंगा में ऊफान के कारण जहां कुतलुपुर, जाफरनगर, टीकारामपुर, सीताचरण के हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं. वहीं तौफिर, भेलवा, हरिणमार, रहिया, कल्याणटोला सहित बरियारपुर, असरगंज, खड़गपुर, धरहरा एवं जमालपुर प्रखंड के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में है. चारों ओर से लोग पानी से घिर गये हैं और कई घरों में पानी प्रवेश कर गया है. मुंगेर जिला प्रशासन द्वारा अमरपुर उच्च विद्यालय एवं जिला स्कूल मुंगेर में राहत शिविर खोले गये हैं. बड़ी संख्या में बाढ़ पीड़ित बबुआघाट, सोझीघाट व सड़क किनारे शरण लिये हुए है.
कहीं सरकारी व्यवस्था के तहत तो कहीं अपनी व्यवस्था के तहत लोग घर-वार छोड़ कर बच्चे, महिलाओं व मवेशी को लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच रहे. बबुआघाट में सैकड़ों बाढ़ पीड़ित डेरा डाल दिये हैं. सीताचरण के रामबती देवी, सुंदरी देवी, अबोध सिंह ने कहा कि किसी प्रकार जान बचाकर यहां पहुंचे हैं. लेकिन काफी परेशानी हो रही. कुतलुपुर के निरंजन सिंह ने बताया कि शिवराम चौधरी टोला, कचहरी टोला, हरि बाबू टोला गांव पूरी तरह जलमग्न हो गया है.
पहुंची एसडीआरएफ की टीम मुंगेर: बाढ़ से जान माल की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सजग और सर्तक है. 20 सदस्यीय एसडीआरएफ की टीम मुंगेर पहुंच गयी है. टीम बाढ़ से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हर साजो समान को दुरुस्त कर लिया है और किसी भी समय सूचना मिलने पर कूच करने को पूरी तरह से लैस हो चुका है.
