मुंगेर : गंगोत्री के तत्वावधान में रविवार को बेलन बाजार में एक परिचर्चा आयोजित की गयी. जिसका विषय ” मजहब और आतंकवाद ” था. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ केके वाजपेयी ने की. मुख्य वक्ता डॉ शिवचंद्र प्रताप ने कहा कि मजहब नहीं बल्कि मजहब के सियासी इस्तेमाल की उपज है आतंकवाद. इस बात को समझने के लिए हमें इतिहास को समझना चाहिए. यह समझना जरूरी है कि इस्लाम शब्द का सलाम सबकी सलामती का मायने रखता है.
अपना सियासी दबदबा कायम रखने के लिए इस्लाम को हथियार की तरह सीरिया के अधिनायक यजीद ने इस्तेमाल किया. उसी की याद में मुसलमान हर वर्ष मुहर्रम मनाते है. मुहर्रम के दिन सिया संप्रदाय वाले महज शोक मनाकर संतोष कर लेते हैं तो सुन्नी संप्रदाय वाले उस दिन शहादत दिवस मान कर गौरवान्वित होते है. अलकायदा और लश्करे तोयबा जैसे यजीदवादी आतंकी संगठन अल्लाह और इस्लाम के नाम पर इस्लाम का ही गला घोंटते है.
आतंकवाद को प्रश्रय देने वाला कोई देश इस्लाम को नहीं समझ रहा है. बहुत जल्द ही इस्लाम का सही रूप सामने आयेगा और आतंकवाद का स्वत: खात्मा हो जायेगा. मौलाना अबुल कलाम आजाद ने कुरान शरीफ की सुरतुल बकरति -2 की 177 वीं आयात के हवाले से कहा कि खुदा की मुहब्बत की राह उसके बंदों की मुहब्बत में से गुजरती है.
जो इंसान चाहता है कि खुदा से मुहब्बत करे, उसे चाहिए कि उसके बंदों से मुहब्बत करना सीखें. मौके पर प्रो. अवध किशोर सिंह, श्यामसुंदर प्रसाद सिंह, डॉ पूनम रानी, डॉ दिनेश मोहन झा, शिवनंदन सलिल, गुरुदयाल त्रिविक्रम, नारायण जालान, शीतांशु शेखर सहित अन्य मौजूद थे.
