आठ वर्ष बाद भी चालू नहीं हुआ फुलका हॉल्ट

जमालपुर : पूर्व रेलवे की कार्यप्रणाली में मंथर गति का जीता जागता प्रमाण फुलका हॉल्ट है. इस हाल्ट को स्वीकृति मिले लगभग आठ वर्ष हो गये परंतु इसे पूर्ण हॉल्ट का न तो दर्जा मिल पाया और न ही यहां ट्रेनों का ठहराव आरंभ हो पाया है. इसके कारण स्थानीय लोगों में क्षोभ व्याप्त है. […]

जमालपुर : पूर्व रेलवे की कार्यप्रणाली में मंथर गति का जीता जागता प्रमाण फुलका हॉल्ट है. इस हाल्ट को स्वीकृति मिले लगभग आठ वर्ष हो गये परंतु इसे पूर्ण हॉल्ट का न तो दर्जा मिल पाया और न ही यहां ट्रेनों का ठहराव आरंभ हो पाया है. इसके कारण स्थानीय लोगों में क्षोभ व्याप्त है.

रेलमंत्री ने किया था शिलान्यास
29 दिसंबर 2008 में फुलका हॉल्ट को स्वीकृति मिली थी. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि उसके बाद 27 फरवरी 2013 को तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा हाल्ट का शिलान्यास भी किया गया. तब से अबतक मालदह रेल मंडल के बाबुओं के लालफीताशाही तथा वरीय रेल अधिकारियों की उदासीनता व लापरवाही के कारण मामला फंसा पड़ा है.
वर्ष 2010 में निकली थी निविदा
फुलका हाल्ट समेत मालदह रेल डिवीजन के अन्य हॉल्टों के ठेकेदार के लिए समाचार पत्र में 29 दिसंबर 2010 को निविदा निकाली गई थी. इसके बाद मंथर गति से कार्यों के निष्पादन के कारण 11 अक्तूबर 2012 को ठेकेदार अभ्यर्थियों का साक्षात्कार भी लिया गया था. लेकिन यह मामला अबतक रेलवे के फाइलों में ही दम तोड़ रही है.
कहते हैं स्थानीय निवासी
स्थानीय निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक अजब लाल यादव, नीलेंद्र प्रसाद यादव, रिटायर्ड रेलकर्मी नरसिंह मंडल, अंबिका यादव, आनंद वीर यादव तथा राजद नेता विनय कुमार यादव ने रेलवे अधिकारियों से फुलका हाल्ट पर जल्द से जल्द ठेकेदार की नियुक्ति करने तथा टिकटों की बिक्री करने एवं ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित कराने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि इससे जहां इस क्षेत्र के हजारों रेलयात्रियों को राहत मिलेगी वहीं रेलवे को भी राजस्व की प्राप्ति होगी.
खड़िया रेलवे हॉल्ट तक के जर्जर सड़क पर भयभीत यात्रा कर रहे हैं यात्री
बरियारपुर. खडि़या रेलवे हॉल्ट से गांव की ओर जाने वाली सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. जिसके कारण इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. खडि़या रेलवे हॉल्ट पर कई पैसेंजर ट्रेन का ठहराव होता है. जिससे दर्जनों गाडि़यां इस हॉल्ट से खुलती है और रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग सवारी वाहनों पर बैठ कर यात्रा करते हैं.
खडि़या रेलवे हॉल्ट से सवारी वाहन खडि़या, कटहरा, पिपड़ा, अमैया, बैजलपुर सहित अन्य गांव के पैसेंजर को ढोते हैं. लेकिन इस हॉल्ट से गंतव्य स्थान की ओर जाने वाली सड़क पूरी तरह जर्जर है और बीच-बीच में बड़े गड्ढ़े हो चुके हैं. जिसके कारण वाहन पर बैठने के दौरान हिचकोला मारते हुए यात्री यात्रा करने को मजबूर हैं.
स्थिति यह बनी रहती है कि वाहन कभी दायें की ओर झुक जाती है तो कभी बायें की ओर. जिसके कारण वाहन पर सवार यात्रियों को हमेशा दुर्घटना का डर सताते रहता है. स्थानीय संजय कुमार सिंह, पंकज कुमार, बंटी, शालीग्राम, विनय झा, संजय प्रसाद सहित अन्य लोगों ने बताया कि वर्ष 2005 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क का निर्माण कराया गया. उसके बाद एक नंबर पुल से भारती उच्च विद्यालय खडि़या तक सड़क की मरम्मती नहीं हो पायी.
जिसके कारण सड़क की स्थिति दिन प्रतिदिन जर्जर होती चली गयी और स्थानीय लोगों के साथ ही वाहन चालकों की भी परेशानी बढ़ गयी. स्थानीय लोगों ने जिला पदाधिकारी से मांग किया है कि इस दिशा में ठोस कदम उठाया जाय और जर्जर सड़क से निजात दिलाया जाय.

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