मुंगेर : मकर संक्रांति का पर्व इस बार भी 15 जनवरी को मनाया जायेगा. पिछले तीन वर्षों से मकर संक्रांति का 14 एवं 15 जनवरी के पेंच में फंसता जा रहा है. विभिन्न पंचांगों के अनुसार 15 जनवरी को मकर संक्रांति है. हालांकि वर्षों से चली आ रही 14 जनवरी की परंपरा को मानने वाले लोग गुरुवार को ही दही-चुरा का आनंद लेंगे.
मकर संक्रांति यूं तो 14 जनवरी को ही मनाया जाता रहा है. किंतु वर्ष 2012 में भी यह पर्व 15 जनवरी को मनायी गयी थी. बनारसी व लहोरी पंचांग के अनुसार शुक्रवार की सुबह 07:34 बजे से सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा और उसी दिन मकर संक्रांति मनायी जायेगी. जबकि मिथिला पंचांग में भी शुक्रवार को ही सुबह 06:56 बजे से भगवान सूर्य के मकर में संक्रमण का उल्लेख किया गया है. पंडितों के अनुसार शुक्रवार को ही मकर संक्रांति मनाना सही है.
पंडित बासुकीनाथ मिश्र के मुताबिक 15 जनवरी को मकर संक्रांति है. इसी दिन भगवान भास्कर मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होंगे. इस मौके पर तिल ग्रहण करने व स्नान दान कर पुण्य के भागी बनने का महत्व है. शास्त्रों में मकर स्नान का विशेष महत्व बताया गया है और इस दिन तिल-गुड़ व दही-चुरा भी दान किया जाता है.
जमकर हो रही तिलकुट की बिक्री
मकर संक्रांति पर जमकर तिलबा-तिलकुट की बिक्री हो रही है. मुंगेर के दर्जनों स्थानों पर जहां कारीगर दिन-रात तिलकुट बनाने में लगे हैं. वहीं गांधी चौक, सादीपुर, कौड़ा मैदान में तिलकुट की दर्जनों दुकानें लगी है. जहां अलग-अलग क्वालिटी के तिलकुट मिल रहे हैं.
तिलबा व गुड़ का
भी डिमांड
तिला संक्रांति के मौके पर तिलबा व गुड़ का भी काफी महत्व है और बाजार में इसकी डिमांड भी बढ़ गयी है. एक ओर जहां दूध की किल्लत है तो दूसरी ओर तिलबा व गुड़ की बिक्री जमकर हो रही. इसके साथ ही कतरनी चुरा, मुढ़ी की भी बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. लोग पूजा के लिए तिल की भी खरीदारी कर रहे हैं.
