शिक्षा आयोग ने चरित्र निर्माण पर नहीं दिया बल : अतुल भाई कोठारी फोटो संख्या : 9,10फोटो कैप्सन : मंचासीन अतिथि व उपस्थित प्रतिनिधि, मुंगेर संस्कृति शिक्षा उत्थान समिति के राष्ट्रीय संयोजक अतुल भाई कोठारी ने कहा कि आजादी के बाद शिक्षा के विकास के लिए दो आयोग गठित किये गये. लेकिन किसी भी आयोग ने चरित्र निर्माण पर बल नहीं दिया. आज तीन स्तरों पर मूल्य शिक्षा व भाषा शिक्षा की आवश्यकता है. वे गुरुवार को सरस्वती शिशु मंदिर सादीपुर के प्रशाल में आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. गोष्ठी का आयोजन भारती शिक्षा समिति की ओर से किया गया था. अतुल भाई कोठारी ने कहा कि आज भारतीय शिक्षा के लिए पहले शिक्षा का उद्देश्य और फिर बाद में उसके नीति का निर्धारण होना चाहिए. बच्चे जन्म से निर्दोष शुद्ध चरित्र वाला होता है. लेकिन परिवार, समाज व शिक्षक उसे मूल्य प्रदान करता है. इसके लिए जहां शिक्षक को कटिबद्ध व मूल्य परख होना होगा. वहीं मिथ्या प्रशंसनीय कार्य छोड़ना होगा. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण में भी मातृभाषा में शिक्षा देने से ही स्वस्थ समाज का विकास होता है. उन्होंने स्वस्थ शिक्षा नीति के लिए तीन सुझाव भी दिये. जिसमें विद्यालय स्तर पर गोष्ठी व मानव विकास तथा शिक्षा समिति के बीच समन्वय को जरूरी बताया. डॉ प्रेमनाथ पांडेय ने कहा कि शिक्षा के बल पर ही किसी देश का उत्थान व पतन निर्भर करता है. जबकि रामनरेश प्रसाद ने बताया कि यूनेस्को ने 1993 में कहा था कि अपनी ही भाषा में देश शिक्षा दे तभी उसका विकास हो सकता है. प्रो. विद्या सागर ने बताया कि समाज शिक्षा के आधार पर बनता है. इसलिए शिक्षा को नैतिकता पूर्ण बनाना ही होगा. इसके लिए कॉमन स्कूल सिस्टम को लागू करना जरूरी है. मौके पर सुरेश प्रसाद यादव, डॉ कमल किशोर सिन्हा ने भी अपने विचार व्यक्त किये. गोष्ठी में मुंगेर, जमालपुर एवं लखीसराय के लगभग 400 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य नवीन कुमार मिश्र, प्रधानाचार्य संजीव कुमार मिश्र, मनोज कुमार मिश्रा, अल्पना शर्मा, मृत्युंजय मुख्य रूप से मौजूद थे.
शक्षिा आयोग ने चरत्रि नर्मिाण पर नहीं दिया बल : अतुल भाई कोठारी
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