मुंगेर : भगवान अमीर-गरीब में लोगों को विभक्त किया. जिसके बीच काफी अंतर है. यही कारण है कि अमीर तो बीमार पड़ सकते हैं पर गरीब को बीमार पड़ने की इजाजत नहीं है. अगर गरीब बीमार पड़ता है तो उसका इलाज सदर अस्पताल में सही ढंग से नहीं हो पाता. जिसका जीता जागता उदाहरण है अस्पताल के महिला वार्ड में भरती 20 वर्षीय आंचल देवी.
मोगल बाजार निवासी विकास राम दैनिक मजदूरी करता है. उसकी पत्नी आंचल देवी पांच माह के गर्भ से थी. उसके पेट में दर्द होने पर उसे 24 दिसंबर को सदर अस्पताल में भरती कराया गया. जिसके बाद चिकित्सकों ने उसका इलाज तो किया लेकिन निदान नहीं हो पाया. अधिकांश दवा बाहर से लाकर दिया जाता था. खून की कमी बताने पर पति ने 24 दिसंबर को ही खून डोनेट कर ब्लड बैंक से खून प्राप्त किया और पत्नी को चढ़वाया. विकास ने कहा कि जब 25 दिसंबर को पत्नी को तकलीफ होने लगी तो चिकित्सकों को काफी खोजा पर वे नहीं मिले. नर्स ने बताया कि आज बड़ा दिन का छुट्टी है.
आज महिला चिकित्सक नहीं आयेंगे. जिसके बाद नर्स ने ही किसी तरह उसका इलाज किया. 26 दिसंबर की सुबह में उसने अल्ट्रासाउंड कराया तो पांव से जमीन खिसक गयी. क्योंकि आंचल के पेट में बच्च मर चुका था. वह भर दिन अस्पताल में महिला चिकित्सक की वाट देखती रही. लेकिन 3 बजे तक महिला चिकित्सक नहीं आयी. शाम में जब लेडी डॉक्टर ने रिपोर्ट देखा तो बताया कि दवा-सूई से काम हो जायेगा. चिंता की कोई बात नहीं लेकिन विकास अपनी पत्नी को लेकर काफी परेशान है कि आखिर उसके पत्नी का क्या होगा. क्योंकि पेट में ही बच्च मर चुका है. यदि उसे शीघ्र नहीं निकाला गया तो आंचल के जान पर भी खतरा है. इस संदर्भ में अस्पताल उपाधीक्षक से बात करने का प्रयास किया गया किंतु वे उपलब्ध नहीं हुए.
