Raxaul Nagar Parishad Action: रक्सौल नगर परिषद कार्यालय में घोर अनुशासनहीनता, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और गोपनीय दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. मामले में कड़ा प्रशासनिक संज्ञान लेते हुए कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार ने प्रभारी प्रधान सहायक चंदेश्वर बैठा और उच्च वर्गीय सहायक मृत्युंजय मृणाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. दोनों कर्मियों पर कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था से छेड़छाड़ करने, नगर प्रबंधक के कक्ष का सीसीटीवी कैमरा क्षतिग्रस्त कराने और एक बाहरी व्यक्ति को बैठाकर गोपनीय सरकारी फाइलें दिखाने जैसे गंभीर आरोप हैं. निलंबन के साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है.
बाहरी व्यक्ति को दिखाई जा रही थी फाइलें, तोड़ा गया सीसीटीवी
मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना बीते 31 अगस्त को घटी थी. प्रभारी प्रधान सहायक चंदेश्वर बैठा और उच्च वर्गीय सहायक मृत्युंजय मृणाल ने नगर प्रबंधक के कार्यालय कक्ष में एक अनधिकृत बाहरी व्यक्ति को बैठा रखा था और उसे महत्वपूर्ण सरकारी फाइलें व दस्तावेज दिखाए जा रहे थे. इसी दौरान कमरे में सुरक्षा और निगरानी के लिए लगे सरकारी सीसीटीवी कैमरे को भी जानबूझकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया. मामला उजागर होने के बाद कार्यपालक पदाधिकारी ने दोनों कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन दोनों का स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया. इसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निलंबन का आदेश जारी कर दिया.
स्वच्छता कोषांग में बनाया गया मुख्यालय, जीवन निर्वहन भत्ता मिलेगा
आदेश के तहत निलंबन की अवधि में दोनों कर्मियों का कार्यस्थल और मुख्यालय नगर परिषद रक्सौल के स्वच्छता कोषांग में निर्धारित किया गया है. निलंबन अवधि के दौरान उन्हें सरकारी नियमानुसार केवल जीवन निर्वहन भत्ता ही दिया जाएगा. अधिकारियों ने साफ किया है कि सरकारी दफ्तर की गोपनीयता भंग करने और निगरानी तंत्र को नुकसान पहुंचाने की किसी भी हरकत को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मामले में गठित जांच दल दोनों कर्मियों के आचरण की विस्तृत जांच कर रहा है.
चंदेश्वर बैठा पर टैक्स वसूली का 26 लाख रुपये बकाया
इधर, निलंबित प्रभारी प्रधान सहायक चंदेश्वर बैठा पर सरकारी राशि में भारी वित्तीय अनियमितता का एक दूसरा गंभीर मामला भी सामने आया है. उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2025-26 के बीच उनके पास कुल 25 लाख 98 हजार रुपये की सरकारी राशि बकाया है. बताया गया है कि पूर्व में कर संग्राहक (टैक्स कलेक्टर) के पद पर तैनाती के दौरान उन्होंने आम जनता से टैक्स के रूप में मोटी रकम तो वसूली, लेकिन उस पूरी राशि को सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया.
महालेखाकार कार्यालय से जारी हुआ था मेमो, फिर मिला नोटिस
टैक्स की इस भारी रकम के गबन का खुलासा ऑडिट जांच के दौरान हुआ था, जिसके बाद महालेखाकार (एजी) कार्यालय ने सरकारी कोष में राशि जमा कराने को लेकर मेमो जारी किया था. नगर परिषद द्वारा पूर्व में पूछे गए स्पष्टीकरण के बावजूद चंदेश्वर बैठा ने बकाया सरकारी राशि जमा नहीं कराई. अब नगर परिषद प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए 26 लाख रुपये की सरकारी वसूली के लिए उन्हें पुनः अंतिम नोटिस जारी किया है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद कानूनी प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने सहित अन्य कठोर कदम भी उठाए जाएंगे.
