Motihari: नाव हादसे में दो और शव बरामद, मृतकों की संख्या हुई तीन

लखौरा सरेह के नाव हादसे में लापता दो लोगों का शव बरामद कर लिया गया. मृतकों की संख्या अब तीन हो गयी.

Motihari: मोतिहारी. लखौरा सरेह के नाव हादसे में लापता दो लोगों का शव बरामद कर लिया गया. मृतकों की संख्या अब तीन हो गयी. एक अधेड़ का शव शनिवार शाम में बरामद हुआ था. लापता दो युवकों की रात भर तलाश चली. तब जाकर उनका शव बरामद हुआ. नाव पर 14 लोग सवार थे. 11 लोगों ने तैर कर अपनी जान बचायी थी. मृतकों में लखौरा ब्रह्मटोला के जालिम सहनी का पुत्र मुकेश सहनी (37), बाबूलाल सहनी (59) का शव रविवार को मिला. लखौरा पुरवारी टोला के कैलाश सहनी (49) का शव शनिवार शाम में ही बरामद कर लिया गया था. पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया है. जानकारी के अनुसार टीन की नाव पर सवार 14 लोग मवेशी चारा के लिए दो किमी दूर बांध पर गये थे. पूरा इलाका बाढ़ के पानी से लबालब है. लौटते समय तेज हवा के कारण नाव पलट गयी. इससे नाव पर सवार सभी लोग डूब गये. हादसे की खबर मिलते ही पूरा गांव घटना स्थल पर इकट्ठा हो गया. 11 लोगों को बचा लिया गया, जबकि एक का शव बरामद हुआ. दो लोगों का कोई सुराग नहीं मिला. जिला मुख्यालय से एनडीआरएफ की टीम पहुंची. घंटों तक लापता लोगों की खोजबीन की गयी, लेकिन अंधेरे के कारण सफलता नहीं मिली. रविवार को सुबह दोनों का शव बरामद हुआ. शव मिलते ही उनके घरों में चीख-पुकार मच गयी. नाव पर मुखिया पति विजय सहनी भी सवार थे. इलाज के लिए उनको एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है. बताया जाता है कि दोपहर करीब दो बजे टीन की नाव पर सवार होकर 14 लोग बांध पर मवेशी के लिए चारा काटने गये थे. चारा लेकर शाम पांच बजे वापस लौट रहे थे. नाव बीच सरेह में पलट गयी. छह लोग अपनी जान बचा गांव पहुंच घटना की जानकारी दिये. इसके बाद इलाके के लोग नाव लेकर डूबे लोगों की खोजबीन करने निकले. डूबे छह लोगों को बाहर निकाला गया. कैलाश सहनी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. डीएम सौरभ जोरवाल ने बताया कि मृतकों को उचित सरकारी सहायता दी जायेगी. ग्रामीण शिवलाल सहनी ने प्रशासन से आश्रितों को 25-25 लाख मुआवजे के साथ जमीन व आवास देने की मांग की. घायलों को दस-दस लाख रुपये सहायता राशि की भी मांग की है. परिवार में मचा कोहराम, रो-रोकर बुरा हाल घटना के बाद पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया. बताया जाता है कि कैलाश सहनी को तीन बेटे व एक लड़की है. लड़की की शादी की बात चल रही थी. मुकेश सहनी को दो बच्चे हैं. बाबूलाल सहनी को दो लड़का व तीन लड़की है. उसकी दो लड़की की शादी हाे चुकी है. लकड़ी की नाव रहती तो नहीं जाती जान ग्रामीणों ने कहा कि अगर नाव लकड़ी की होती तो तेज हवा के बावजूद नहीं पलटती. टीन की नाव हल्की होती है, जो हवा का झोंका बर्दाश्त नहीं कर पायी. कैलाश सहनी के भतीजे ने बताया कि लकड़ी की नाव रहती तो लोगों की जान नहीं जाती. उसने प्रशासन से लड़की की नाव की व्यवस्था करने की मांग की है.

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