UPI के नए नियमों को लेकर व्यापारियों में चिंता, 2 हजार की सीमा बढ़ाकर 10 हजार करने की मांग

2 हजार रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर प्रस्तावित MDR से व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है. कुछ कारोबारी UPI भुगतान लेने से परहेज कर नकद मांग रहे हैं. वे ₹2000 की सीमा बढ़ाकर ₹10 हजार करने की मांग कर रहे हैं.

New Upi Rule: मोतिहारी के  चकिया अनुमंडल मुख्यालय के बाजारों में 2 हजार रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर व्यापारिक वर्ग में चिंता बढ़ने लगी है. 15 अक्टूबर से MDR लागू होने की चर्चा के बीच कुछ कारोबारी अभी से UPI भुगतान लेने से परहेज करने लगे हैं और ग्राहकों से नकद भुगतान की मांग कर रहे हैं.

चकिया चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव लखिन्द्र प्रसाद ने कहा कि कम मुनाफे वाले कारोबार में अतिरिक्त शुल्क का बोझ व्यापारियों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है. उनका कहना है कि इसका असर आगे चलकर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है.

2 हजार की सीमा बढ़ाकर 10 हजार करने की मांग

व्यापारियों के एक वर्ग ने प्रस्तावित व्यवस्था में 2 हजार रुपये की सीमा को बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने की मांग की है. कारोबारियों का कहना है कि बड़ी राशि के भुगतान में UPI का इस्तेमाल व्यापार के लिए सुविधाजनक है, लेकिन अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ने की स्थिति में छोटे कारोबारियों की लागत प्रभावित हो सकती है.

इसी वजह से व्यापारी सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, ताकि रोजमर्रा के व्यावसायिक लेनदेन में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल जारी रह सके.

कुछ दुकानदार नकद भुगतान पर दे रहे जोर

MDR लागू होने की चर्चा के बीच कुछ दुकानदार ग्राहकों से नकद भुगतान की मांग करने लगे हैं. कुछ दुकानदार UPI में खराबी का हवाला देकर ग्राहकों को नकद भुगतान करने के लिए कह रहे हैं.

व्यापारियों के बीच इस प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर अलग-अलग तरह की आशंकाएं हैं. कारोबारियों का कहना है कि शुल्क का असर उनके रोजमर्रा के लेनदेन और मुनाफे पर पड़ सकता है.

थोक कारोबार में भी बढ़ सकता है शुल्क का बोझ

कारोबारियों ने बताया कि उन्हें थोक व्यापारियों को एक साथ 4-5 हजार रुपये तक का भुगतान करना पड़ता है. ऐसे में यदि ग्राहकों से UPI के माध्यम से भुगतान लिया जाता है तो आगे थोक व्यापारियों को भी डिजिटल माध्यम से राशि भेजनी पड़ सकती है.

व्यापारियों का कहना है कि लगातार होने वाले ऐसे लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ सकता है. खासकर कम मार्जिन वाले कारोबार में इसका असर अधिक पड़ने की आशंका जतायी जा रही है.

व्यापारियों ने जतायी चिंता

चकिया चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव लखिन्द्र प्रसाद ने कहा कि छोटे और कम मुनाफे वाले कारोबारियों की लागत पहले से कई स्तरों पर बढ़ी हुई है. ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान व्यापारियों के लिए नई चुनौती बन सकता है.

व्यापारिक वर्ग ने प्रस्तावित MDR को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और छोटे कारोबारियों को ध्यान में रखते हुए भुगतान सीमा पर पुनर्विचार करने की मांग की है.

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By Nirmal kumar

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