Santosh Jaiswal: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के बाद अचानक चर्चा में आए संतोष कुमार जायसवाल का नाम अब सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है. NEET परीक्षा के कथित पेपर और MBBS एडमिशन रैकेट मामले में गिरफ्तारी के बाद उनका राजनीतिक और व्यक्तिगत सफर चर्चा में है. पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन उत्तरी पंचायत से निकलकर दिल्ली, मुंबई, पटना और बिहार की सक्रिय राजनीति तक पहुंचे संतोष जायसवाल की कहानी अब कई सवाल खड़े कर रही है.
संतोष कुमार जायसवाल मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन उत्तरी पंचायत के निवासी हैं. गांव में उनका अच्छा-खासा प्रभाव माना है. उन्होंने आलीशान घर बनवाया हुआ है. उनके पास संसाधन की कोई कमी नहीं है. गांव से जुड़ाव होने के बावजूद उनका अधिकतर समय मुंबई, दिल्ली और पटना जैसे बड़े शहरों में ही बीता. स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान ऐसे व्यक्ति की रही, जो गांव से निकलकर बड़े राजनीतिक और कारोबारी संपर्क बनाने में सफल रहा.
हवाई यात्रा में हुई मुलाकात, फिर खुला राजनीति का रास्ता
बताया जाता है कि दिल्ली से मुंबई की एक हवाई यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात राजद के एक वरिष्ठ नेता से हुई थी. इसी सफर के दौरान बातचीत बढ़ी और यहीं से उनकी राजनीतिक एंट्री का रास्ता तैयार हुआ. मुंबई से लौटने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल जॉइन किया. पार्टी में उन्हें सिर्फ सदस्यता ही नहीं मिली, बल्कि संगठन में बड़ा पद भी मिला. संतोष जायसवाल को राष्ट्रीय सचिव जैसे अहम दायित्व के साथ पहचान दी गई, जिससे बिहार की राजनीति में उनकी सक्रियता तेजी से बढ़ी.
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के बाद संतोष जायसवाल ने पूर्वी चंपारण में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी. पहले उन्होंने ढाका विधानसभा क्षेत्र में सक्रियता दिखाई. इसके बाद घोड़ासहन क्षेत्र में तैयारी शुरू की. जगह-जगह पोस्टर, बैनर और जनसंपर्क के जरिए उन्होंने खुद को संभावित उम्मीदवार के रूप में स्थापित करने की कोशिश की. बाद में पार्टी स्तर पर मिले संकेतों और सलाह के बाद उन्होंने रक्सौल विधानसभा क्षेत्र में भी अपनी सक्रियता बढ़ाई.
रक्सौल में रिश्तेदार के घर रहकर साधी राजनीतिक जमीन
रक्सौल में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए संतोष जायसवाल ने स्थानीय स्तर पर डेरा डाला. बताया जाता है कि उन्होंने मौजे मुहल्ला क्षेत्र में एक रिश्तेदार के घर को आधार बनाकर क्षेत्रीय राजनीति को साधने की कोशिश की.
बड़े नेताओं के कार्यक्रमों से पहले मोतिहारी, रक्सौल, ढाका और घोड़ासहन जैसे इलाकों में उनकी सक्रिय मौजूदगी दिखाई देती थी. इससे वह स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता के बीच खुद को प्रभावशाली नेता के तौर पर स्थापित करना चाहते थे.
जब उन्हें किसी विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिला, तो धीरे-धीरे उनकी सक्रियता बिहार की जमीनी राजनीति से कम होती गई. इसके बाद उन्होंने फिर दिल्ली का रुख किया.
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दिल्ली लौटने के बाद बदली दिशा
दिल्ली वापसी के बाद संतोष जायसवाल का नाम कथित तौर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, एडमिशन सेटिंग और संपर्क आधारित नेटवर्किंग से जोड़ा जाने लगा. पुलिस जांच के मुताबिक अब उन पर आरोप है कि उन्होंने NEET और MBBS एडमिशन के नाम पर बड़े स्तर पर नेटवर्क खड़ा किया. हालांकि इन आरोपों की जांच जारी है, लेकिन गिरफ्तारी के बाद उनका राजनीतिक सफर अब विवादों के घेरे में आ गया है.
संतोष जायसवाल का सफर गांव की पहचान, बड़े शहरों की मौजूदगी, राजनीतिक संपर्क, संगठन में बड़ा पद और फिर गंभीर आपराधिक आरोपों तक पहुंचा है. पूर्वी चंपारण में कभी पोस्टर और बैनर के जरिए खुद को स्थापित करने की कोशिश करने वाला यह चेहरा अब दिल्ली पुलिस की जांच का बड़ा नाम बन चुका है.
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