रक्सौल से जितेंद्र कुमार की रिपोर्ट
Raxaul Airport News: रक्सौल हवाई अड्डा निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के मुआवजे से वंचित अथवा अब तक अपनी मुआवजा राशि प्राप्त नहीं करने वाले रैयत किसानों के लिए बेहद जरूरी खबर है. जिला भू-अर्जन कार्यालय की ओर से ऐसे सभी रैयतों को आवेदन जमा करने का एक आखिरी सुनहरा अवसर प्रदान किया गया है. इसके लिए विभाग द्वारा एक विशेष कैंप का आयोजन किया जाएगा, जहां संबंधित भूमि मालिक और रैयत किसान अपने तमाम आवश्यक भू-दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे.
सप्ताह में तीन दिन आयोजित होगा विशेष कैंप
विभागीय रूपरेखा के अनुसार, प्रभावित किसानों की सहूलियत के लिए यह विशेष कैंप प्रत्येक सप्ताह के मंगलवार, बुधवार और शुक्रवार को नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा. इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए जिला भू–अर्जन पदाधिकारी अरुण कुमार ने स्पष्ट किया कि प्रभावित रैयतों के लिए यह बिल्कुल अंतिम मौका है. यदि इस बार भी संबंधित भूमि मालिकों द्वारा कैंप में अपना वैध आवेदन जमा नहीं किया जाता है, तो उनकी पूरी मुआवजा राशि को नियमानुसार लारा कोर्ट में ट्रांसफर यानी जमा कर दिया जाएगा.
एयरपोर्ट अथॉरिटी को सौंप दी जाएगी जमीन
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने बताया कि कोर्ट में राशि जमा करने की प्रक्रिया पूरी होते ही अधिग्रहित की गई पूरी भूमि का विधिवत हस्तांतरण एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को कर दिया जाएगा. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि रक्सौल हवाई अड्डा निर्माण के आगामी कार्यों और रनवे की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी बाधा उत्पन्न न हो सके. जिला भू-अर्जन कार्यालय ने एक बार फिर सभी प्रभावित रैयत किसानों से पुरजोर अपील की है कि वे सरकार द्वारा निर्धारित इन तिथियों पर कैंप में निश्चित रूप से पहुंचें और समय रहते अपना आवेदन जमा कर मुआवजे की कागजी प्रक्रिया पूरी करा लें.
काम में रुकावट डालने पर होगी कार्रवाई
इस पूरे अभियान को पारदर्शी तरीके से धरातल पर उतारने के लिए रक्सौल अंचलाधिकारी अरविंद कुमार, जिला भू-अर्जन कार्यालय के प्रधान सहायक अजीत कुमार सहित कई अन्य राजस्व अधिकारी, अंचल कर्मी और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. विभाग का प्रयास है कि हवाई अड्डे के निर्माण कार्य शुरू होने से पहले स्थानीय स्तर पर जमीन से जुड़े सभी दावों और विवादों का शत-प्रतिशत निपटारा कर लिया जाए.
