Motihari News: पकड़ीदयाल नगर पंचायत की 15 विभागीय योजनाओं में सामने आयी कथित 63 लाख 77 हजार की वित्तीय अनियमितता का मामला एक बार फिर चर्चा में है. जिलाधिकारी के निर्देश पर करायी गयी जांच में योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में कई खामियां सामने आने के बाद तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अजय कुमार के खिलाफ विभागीय आरोप पत्र भी गठित किया गया था. अब अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, पटना की ओर से उन्हें केवल एक वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का लघु दंड दिये जाने पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
बिना टेंडर करायी गयीं 15 योजनाएं
मामले की जांच जिलाधिकारी, पूर्वी चंपारण के निर्देश पर भूमि सुधार उपसमाहर्ता, पकड़ीदयाल की अध्यक्षता में करायी गयी थी. जांच में नगर पंचायत की 15 विभागीय योजनाओं को बिना टेंडर विभागीय स्तर पर कराये जाने की बात सामने आयी. निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाये गये.
जांच रिपोर्ट में कई सड़कों की मोटाई महज दो से तीन इंच होने और पीसीसी निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किये जाने का उल्लेख किया गया. रिपोर्ट के अनुसार, इन योजनाओं में कुल ₹63 लाख 77 हजार की वित्तीय अनियमितता सामने आने का दावा किया गया.
संयुक्त जांच की भी हुई थी अनुशंसा
जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गयी थी. इसके लिए भूमि सुधार उपसमाहर्ता और स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-2 के कार्यपालक अभियंता से संयुक्त जांच कराने की बात भी कही गयी थी.
तत्कालीन EO पर लगा विभागीय आरोप
जांच के आधार पर नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार ने तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अजय कुमार के खिलाफ विभागीय आरोप पत्र गठित किया. आरोप पत्र में बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियम 3(1)(i), (ii) एवं (iii) के उल्लंघन का आरोप लगाया गया.
इसमें लापरवाही, स्वेच्छाचारिता, अनुशासनहीनता और वित्तीय अनियमितता से जुड़े आरोप शामिल थे. यानी मामला केवल निर्माण की गुणवत्ता तक सीमित नहीं था, बल्कि सरकारी प्रक्रिया के पालन पर भी सवाल उठाये गये थे.
एक वेतनवृद्धि रोकने के आदेश पर उठे सवाल
मामले में अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, पटना ने ज्ञापांक-112, दिनांक 15 जून 2026 को आदेश जारी किया. इसके तहत तत्कालीन EO अजय कुमार की एक वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का लघु दंड दिया गया.
इस कार्रवाई पर परिवादी राजेश कुमार जायसवाल ने आपत्ति जतायी है. उनका कहना है कि जब जांच में ₹63.77 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आयी और विभागीय आरोप पत्र भी गठित हुआ, तो केवल एक वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई पर्याप्त है या नहीं, इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
परिवादी राजेश कुमार जायसवाल ने कहा कि मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जायेगी. साथ ही संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और कथित वित्तीय अनियमितता की राशि की वसूली की मांग की जायेगी. अब देखना होगा कि इस मामले में आगे प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर क्या कार्रवाई होती है.
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