मोतिहारी के महिला कॉलेज में दो दिवसीय मधुबनी पेंटिंग कार्यशाला का हुआ भव्य आयोजन

मोतिहारी के डॉ. श्री कृष्ण सिंहा महिला कॉलेज में मधुबनी पेंटिंग पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई, जिसमें छात्राओं को मिथिला कला की बारीकियां सिखाई गईं।

Madhubani painting: मोतिहारी के डॉ श्री कृष्ण सिंहा महिला कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत मधुबनी पेंटिंग विषय पर दो दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ नलीन विलोचन ने की, जबकि मुख्य प्रशिक्षक के रूप में डॉ अणिमा अनुरागिनी उपस्थित रहीं. कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को पारंपरिक लोक कला से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था.

Mithila art training: मधुबनी चित्रकला की विस्तृत जानकारी और आधारभूत बनावट

कार्यशाला के प्रथम दिवस पर मुख्य प्रशिक्षक डॉ अणिमा अनुरागिनी ने महाविद्यालय की छात्राओं को मधुबनी चित्रकला की विस्तृत जानकारी दी और इसकी आधारभूत बनावट के गुर सिखाए. उन्होंने बताया कि मिथिला चित्रकला के नाम से प्रसिद्ध यह लोक कला अब विश्व प्रसिद्ध हो चुकी है. इसमें मुख्य रूप से सामाजिक जीवन, पर्व-त्योहारों, प्रकृति और जीव-जंतुओं को चित्रों के माध्यम से बहुत ही खूबसूरती से दर्शाया जाता है.

प्रकृति, खुशहाली और उर्वरता के प्रतीक चिन्ह

डॉ अणिमा ने बताया कि इन चित्रों में सूरज, चंद्रमा, केले के पौधे, मछलियां, कछुए और चिड़िया आदि को विशेष रूप से चित्रित किया जाता है. ये सभी प्रतीक भारतीय संस्कृति में खुशहाली और उर्वरता के परिचायक माने जाते हैं. प्रशिक्षक ने छात्राओं को मधुबनी पेंटिंग की विभिन्न शैलियों और उनकी बारीकियों से अवगत कराया.

वैश्विक पहचान और ऐतिहासिक महत्व की चर्चा

दूसरे दिन के सत्र में महाविद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि मिथिला पेंटिंग की वैश्विक पहचान मुख्य रूप से 1960 के दशक में स्थापित हुई. वर्ष 2007 में इसे जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग यानी जीआई टैग प्राप्त हुआ, परंतु इस प्राचीन कला की शुरुआत पांचवीं-छठी शताब्दी ईसापूर्व की मानी जाती है. डॉ अणिमा ने कहा कि शिक्षा हमें साक्षर बनाती है, जबकि कला हमें संस्कारवान और सुसंस्कृत बनाती है.

स्वरोजगार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में पहल

इस दो दिवसीय कार्यक्रम का सफल मंच-संचालन महाविद्यालय की एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ अर्पणा ने किया. डॉ अर्पणा ने अपने संबोधन में कहा कि आत्मनिर्भर भारत और स्वरोजगार योजना को बढ़ावा देने की दिशा में यह कार्यशाला एक बहुत बड़ा कदम है. कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के सभी शिक्षकगण और शिक्षकेत्तर कर्मचारी भी उपस्थित रहकर छात्राओं का उत्साहवर्धन करते दिखे.

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By अमृतेश कुमार

अमृतेश 15 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. खबर पर हमेशा पैनी नजर रखने वाले अमृतेश को क्षेत्रीय और जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. वर्तमान में ये डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में अपनी लेखनी के जरिए लगातार सक्रिय हैं.

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