Motihari: प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को दिया गया प्रशिक्षण

कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी के मृदा वैज्ञानिक डॉ आशीष राय द्वारा पहाड़पुर के बलुआ गांव में किसानों के बीच में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्राकृतिक खेती विषय पर आयोजित की गयी.

Motihari: पहाड़पुर. कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी के मृदा वैज्ञानिक डॉ आशीष राय द्वारा पहाड़पुर के बलुआ गांव में किसानों के बीच में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्राकृतिक खेती विषय पर आयोजित की गयी. जिसमें किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों के बारे में विस्तार से बताया गया. प्रशिक्षण के पहले दिन किसानों को जीवामृत पंचगव्य, घनामृत और नीमास्त्र के बारे में बताया गया. जिसमें किसानों को यह बताया गया कि कैसे जैविक खाद और कीटनाशी को अपने घर पर ही बना करके खेतों में उपयोग कर सकते हैं. प्रशिक्षण के दूसरे दिन किसान भाइयों को जीवामृत, पंचगव्य, नीमस्त्र और घनामृत के लगने वाले विभिन्न उत्पादों और उनके उपयोग का सजीव बनाने का तरीका बताया गया.

जीवामृत में लगने वाले मुख्य उत्पाद

देशी गाय का गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड, और उपजाऊ मिट्टी, प्लास्टिक का ड्रम छायादार स्थान में रख करके सर्वप्रथम ड्रम को आधा पानी भरकरके उसमें गोबर को डालकर के घोला जाता है, उसके बाद गोमूत्र को डाल करके घोला जाता है. फिर बेसन को डाला जाता है और अंत में गुड का छोटा-छोटा टुकड़ा मिट्टी में मिलाकर के डाल दिया जाता है . वही फिर इसको डंडे से हिला करके बढ़िया से मिक्स करके ड्रम को ढक दिया जाता है. अगले दिन इसमें थोड़ा सा पानी और मिलाते हैं, और ड्रम को पूरा नहीं भरते हैं . थोड़ा जगह ऊपर से छोड़ देते हैं इस प्रकार 8 से 10 दिन सुबह शाम ड्रम को लकड़ी के डंडे से बढ़िया से इस घोल को मिलाते रहते हैं . फिर जीवामृत तैयार हो जाता है.वरीय वैज्ञानिक व प्रधान डा अभय कुमार सिंह ने किसानों को तीसरे दिन केवीके परिसर में प्रशिक्षण के दौरान बताया कि प्राकृतिक खेती में सब्जी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं. कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी के कृषि अभियांत्रिकी वैज्ञानिक डा अंशु गंगवार ने किसानों को बताया कि कैसे पंचगव्य, जीवामृत और नीमस्त्र का उपयोग फलों सब्जियों और पौधों पर करें इसके लिए स्प्रेयर का उपयोग कर सकते हैं, नाली में पानी जाने वाले रास्ते का उपयोग कर सकते हैं या खेत की तैयारी करते समय सीधे जो है खेत में इसका छिड़काव करके उपयोग कर सकते हैं.

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Author: AMRITESH KUMAR

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