Bihar Pension Yojna: बिहार सरकार की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं को लेकर जारी ताजा आंकड़ों में पूर्वी चंपारण ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. जिले में 4.53 लाख से अधिक लाभार्थियों के साथ यह राज्य में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. प्रशासन ने इसे मिशन मोड में चलाए गए अभियान का परिणाम बताया है.
मधुबनी पहले, पटना दूसरे और पूर्वी चंपारण तीसरे स्थान पर
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जारी राज्य स्तरीय रिपोर्ट में मधुबनी 4,74,384 लाभार्थियों के साथ पहले स्थान पर है. पटना 4,56,563 लाभार्थियों के साथ दूसरे और पूर्वी चंपारण 4,53,351 लाभार्थियों के साथ तीसरे स्थान पर है. वहीं मुजफ्फरपुर 4,17,002 लाभार्थियों के साथ चौथे स्थान पर है. सबसे कम लाभार्थी शिवहर जिले में 66,875 दर्ज किए गए हैं.
पूर्वी चंपारण में मिशन मोड में चला अभियान
जिला प्रशासन के अनुसार, जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव के निर्देश पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाकर पात्र लोगों की पहचान की गई. पेंशन आवेदनों के सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी लाई गई, जिससे लंबित मामलों का जल्द निपटारा हुआ.
इसके अलावा आधार लिंकिंग और बैंक खातों से जुड़ी डीबीटी संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए प्रखंड स्तर पर विशेष कैंप लगाए गए, जिससे पात्र लाभार्थियों को समय पर योजना का लाभ मिल सका.
नियमित समीक्षा से कम हुई पेंडेंसी
जिला प्रशासन ने प्रखंड स्तर के अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कर लंबित मामलों की निगरानी की. डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी पात्र व्यक्ति सामाजिक सुरक्षा पेंशन से वंचित नहीं रहना चाहिए. इसी का परिणाम है कि पूर्वी चंपारण राज्य के शीर्ष तीन जिलों में शामिल हो गया.
राज्य में 97.84 लाख से अधिक पेंशनधारी
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत 97,84,035 लाभार्थी हैं. इन सभी को पेंशन मद में 1,423.94 करोड़ रुपये (14,239,466,200 रुपये) का भुगतान किया गया है.
पूर्वी चंपारण में अकेले 661.56 करोड़ रुपये (661,566,700 रुपये) पेंशन मद में वितरित किए गए हैं.
बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को मिल रहा लाभ
मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ जिले के लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों तक पहुंच रहा है. जिला प्रशासन का कहना है कि आगे भी पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने का अभियान जारी रहेगा.
यह भी पढे़ं: बिहार: जनगणना के प्रथम चरण का कार्य संपन्न, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के मानदेय के लिए ₹214.85 करोड़ से अधिक स्वीकृत
