Motihari News: मोतिहारी. नशा सिर्फ शरीर और परिवार को प्रभावित करने वाली समस्या नहीं है, बल्कि इसके अवैध कारोबार के व्यापक प्रभाव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय हो सकते हैं. युवाओं को नशे के पीछे छिपे अवैध नेटवर्क और इसके संभावित खतरों को समझने की जरूरत है. ये बातें भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, मुंबई जोन के पूर्व निदेशक समीर वानखेड़े ने कहीं.
वे रविवार को महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित ‘नशामुक्त युवा भारत’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.
नशे का अवैध कारोबार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा
समीर वानखेड़े ने कहा कि भारत की बड़ी युवा आबादी देश की ताकत है. लेकिन यदि युवा नशे की गिरफ्त में आते हैं तो इसका असर उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार और भविष्य पर पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिये से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक जागरूकता से भी जोड़ना जरूरी है. युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए परिवार और समाज की भी अहम भूमिका है.
ड्रग्स के पैसे से देश विरोधी गतिविधियों की आशंका
वानखेड़े ने कहा कि नशीले पदार्थों का कारोबार अवैध नेटवर्क पर आधारित है. उन्होंने आशंका जतायी कि नशे के कारोबार से आने वाला पैसा अवैध वित्तीय माध्यमों के जरिये देश विरोधी गतिविधियों तक पहुंच सकता है.
उन्होंने कहा कि यदि नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार और आतंकवाद आपस में जुड़ते हैं तो चुनौती और गंभीर हो जाती है. युवाओं को इस खतरे को समझने और नशे से दूर रहने की जरूरत है.
300 किलो हेरोइन मामले का किया उल्लेख
समीर वानखेड़े ने मुंबई में सेवा के दौरान वर्ष 2019 में सामने आये 300 किलोग्राम हेरोइन से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पूछताछ में अफगानिस्तान से आने वाली हेरोइन के मुजफ्फरपुर पहुंचने की बात सामने आयी थी.
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए युवाओं को शिक्षा, खेल, कौशल विकास और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है. परिवार को भी नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए और उन्हें उचित मदद एवं उपचार की ओर प्रोत्साहित करना चाहिए.
‘डिमांड नहीं रुकेगी तो सप्लाई भी नहीं रुकेगी’
पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री और सांसद राधामोहन सिंह ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में तस्करी रोकना जरूरी है, लेकिन इसके साथ नशे की मांग कम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा, “जब तक डिमांड रुकेगी नहीं, तब तक सप्लाई नहीं रुकेगी.” उन्होंने युवाओं में जागरूकता बढ़ाकर नशे की मांग कम करने पर जोर दिया.
राधामोहन सिंह ने बिहार में गांजा समेत विभिन्न मादक पदार्थों के प्रचलन का उल्लेख करते हुए युवाओं को इनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर सावधान किया. उन्होंने हेरोइन के खतरे का जिक्र करते हुए पंजाब में 1980 के दशक के अनुभवों का भी उदाहरण दिया.
नशामुक्त युवा और स्वस्थ समाज का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान नशामुक्त युवा और स्वस्थ समाज के निर्माण का संकल्प लिया गया. वक्ताओं ने युवाओं से नशे से दूर रहने और अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगाने की अपील की.
कार्यक्रम में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने, युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने और समाज में नशामुक्त वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया.
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