मोतिहारी शिक्षा विभाग में DPO के प्रभार पर विवाद, वरीयता की अनदेखी का आरोप; DM को सौंपा प्रतिवेदन

मोतिहारी शिक्षा विभाग में डीपीओ स्थापना के प्रभार को लेकर वरीय और कनीय अधिकारियों के बीच विवाद गहरा गया है। जानिए क्या है पूरा मामला और अधिकारियों का पक्ष।

Motihari Education Department: जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन गिरी के 11 जुलाई को जारी कार्य आवंटन आदेश के बाद शिक्षा विभाग में डीपीओ के प्रभार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. वर्तमान स्थापना डीपीओ गोपाल कृष्ण ने नए कार्य आवंटन पर आपत्ति जताते हुए वरीयता की अनदेखी का दावा किया है. मामला अब जिलाधिकारी तक पहुंच गया है.

गोपाल कृष्ण ने पूरे मामले को लेकर जिलाधिकारी को प्रतिवेदन सौंपा है. उनका कहना है कि उन्हें स्थापना डीपीओ का प्रभार संभाले महज छह महीने हुए हैं और उनके खिलाफ कोई शिकायत या प्रतिकूल टिप्पणी भी नहीं है.

11 जुलाई के आदेश में किसे क्या जिम्मेदारी मिली?

डीईओ राजन गिरी की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, गोपाल कृष्ण को स्थापना शाखा से हटाकर पीएम पोषण योजना का जिला कार्यक्रम पदाधिकारी बनाया गया है.

वहीं, ब्रजेश कुमार को स्थापना एवं समग्र शिक्षा अभियान का प्रभार सौंपा गया है. आशा कुमारी को योजना एवं लेखा के साथ माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा अन्य अधिकारियों के कार्यों का भी पुनर्वितरण किया गया है.

गोपाल कृष्ण ने क्यों उठाया सवाल?

गोपाल कृष्ण का दावा है कि जिन अधिकारियों को स्थापना और समग्र शिक्षा का प्रभार दिया गया है, वे उनसे कनीय हैं. उनके अनुसार, विभागीय प्रावधान के तहत यह जिम्मेदारी वरीय अधिकारी को दी जानी चाहिए.

उन्होंने यह भी दावा किया कि एक बार प्रभार मिलने के बाद दो वर्ष से पहले उसमें बदलाव नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि ये दावे गोपाल कृष्ण के हैं और संबंधित विभाग या डीईओ की ओर से इस पर पक्ष सामने नहीं आया है.

बोले- 1990-91 बैच की है मेरी वरीयता

गोपाल कृष्ण के मुताबिक, उनकी सेवा वरीयता 1990-91 बैच की है और विभाग में उनसे वरिष्ठ कोई अधिकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें स्थापना डीपीओ की जिम्मेदारी संभाले अभी छह महीने ही हुए थे.

उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी जिलाधिकारी को प्रतिवेदन के माध्यम से दी है. साथ ही कहा है कि इस मामले में जिलाधिकारी की ओर से जो भी आदेश दिया जाएगा, उसका अनुपालन करेंगे.

DEO का पक्ष नहीं मिल सका

इस पूरे मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन गिरी का पक्ष जानने के लिए उनके सरकारी मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ.

फिलहाल डीपीओ के कार्य आवंटन और वरीयता को लेकर उठे सवालों पर डीईओ का पक्ष सामने आना बाकी है. वहीं, गोपाल कृष्ण की ओर से जिलाधिकारी को प्रतिवेदन सौंपे जाने के बाद अब आगे के निर्णय पर नजर है.


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लेखक के बारे में

सामंत वर्ष 2013 से यानी पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वाणिज्य (बी.कॉम) और कानून (एलएलबी) स्नातक सामंत को समाचार संकलन, संपादन, कंप्यूटर तकनीक और समाचार प्रबंधन का व्यापक अनुभव है. ये पत्रकारिता के साथ-साथ समाचारों के तकनीकी व प्रबंधकीय कार्यों में विशेष रुचि रखते हैं.

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