एक कमरे में दो कार्यालय और काम का भारी दबाव, मोतिहारी के ICDS दफ्तर की व्यवस्था पर उठे सवाल

मोतिहारी का ICDS जिला प्रोग्राम कार्यालय गंभीर कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है. एक ही कमरे में दो अलग-अलग कार्यालयों के संचालन और सीमित कर्मियों के साथ काम का भारी दबाव बना हुआ है.

Motihari News: मोतिहारी. पूर्वी चंपारण का आईसीडीएस जिला प्रोग्राम कार्यालय कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है. जिले की 28 बाल विकास परियोजनाओं और हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी वाले इस महत्वपूर्ण कार्यालय में पर्याप्त स्थायी कर्मियों की पदस्थापना नहीं है. वर्तमान में कार्यालय एक स्थायी सांख्यिकी सहायक, एक कंप्यूटर ऑपरेटर और एक प्रतिनियुक्त कर्मी के सहारे संचालित हो रहा है. ऐसे में जिला स्तर पर संचालित होने वाले व्यापक कामकाज को लेकर व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.

तीन कर्मियों के सहारे चल रहा जिला कार्यालय

आईसीडीएस जिला प्रोग्राम कार्यालय में वर्तमान में एक स्थायी सांख्यिकी सहायक, एक कंप्यूटर ऑपरेटर और एक प्रतिनियुक्त कर्मी कार्यरत हैं. जिले में 28 बाल विकास परियोजनाओं और हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े कार्यों को देखते हुए कार्यालय में कर्मियों की संख्या सीमित है. इससे काम का दबाव बढ़ने की स्थिति बनी हुई है.

एक ही कमरे में चल रहे दो अलग-अलग कार्यालय

जिला प्रोग्राम कार्यालय की स्थिति इसलिए भी असमंजस वाली है कि इसी कमरे में महिला एवं बाल विकास निगम के कर्मी भी बैठते हैं. दोनों कार्यालयों के कर्मियों के एक ही जगह बैठने के कारण बाहर से आने वाले लोग कई बार निगम के कर्मियों को ही आईसीडीएस जिला प्रोग्राम कार्यालय का कर्मचारी समझ लेते हैं. इससे लोगों को संबंधित काम के लिए सही कार्यालय और कर्मी तक पहुंचने में परेशानी होती है.

हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े हैं महत्वपूर्ण काम

आईसीडीएस के तहत जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन, पोषण ट्रैकर, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाभार्थियों से जुड़े आंकड़ों का संधारण, रिपोर्टिंग और विभिन्न योजनाओं की मॉनिटरिंग जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य होते हैं. इन कार्यों के लिए जिला स्तर पर नियमित समन्वय और डेटा प्रबंधन की जरूरत होती है.

स्थायी पोस्टिंग की जगह प्रतिनियुक्ति पर सवाल

जिला प्रोग्राम कार्यालय में पर्याप्त स्थायी कर्मियों की पोस्टिंग नहीं होने से यह सवाल उठ रहा है कि नियमित पदों पर कर्मियों की नियुक्ति क्यों नहीं की जाती. कार्यालय को बार-बार प्रतिनियुक्त कर्मियों के सहारे संचालित करने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थायी कर्मियों की पर्याप्त संख्या होने से विभागीय कामकाज को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है.

सीमित कर्मियों पर बढ़ रहा काम का दबाव

जिले में आईसीडीएस का कामकाज काफी व्यापक है. ऐसे में जिला कार्यालय में सीमित कर्मियों की मौजूदगी से कार्यों का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है. पोषण ट्रैकर से लेकर विभिन्न योजनाओं की रिपोर्टिंग और मॉनिटरिंग तक कई स्तरों पर काम होता है. इसके अलावा एक ही जगह दो कार्यालयों के संचालन से आम लोगों के बीच बनी असमंजस की स्थिति भी दूर करने की जरूरत है.

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लेखक के बारे में

By सामंत कुमार गौतम

सामंत वर्ष 2013 से यानी पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वाणिज्य (बी.कॉम) और कानून (एलएलबी) स्नातक सामंत को समाचार संकलन, संपादन, कंप्यूटर तकनीक और समाचार प्रबंधन का व्यापक अनुभव है. ये पत्रकारिता के साथ-साथ समाचारों के तकनीकी व प्रबंधकीय कार्यों में विशेष रुचि रखते हैं.

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