Motihari : महिलाओं के लिए हेल्पडेस्क का काम कर रहा दीदी अधिकार केन्द्र

जीविका परियोजना के माध्यम से जिले के तीन प्रखंडों में संचालित दीदी अधिकार केन्द्र गांवों की महिलाओं के लिए हेल्पडेस्क बन गया है.

Motihari : मोतिहारी . जीविका परियोजना के माध्यम से जिले के तीन प्रखंडों में संचालित दीदी अधिकार केन्द्र गांवों की महिलाओं के लिए हेल्पडेस्क बन गया है. जीविका दीदियां अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन कर रही हैं और लैंगिक भेद-भाव से लेकर घरेलू हिंसा से जुड़े शिकायतों का निवारण करा रही हैं. महिलाओं को सरकारी योजनाओं से लाभान्वित भी कर रही हैं. परियोजना कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार,तीन प्रखंडों पताही,चकिया व ढाका में अभी दीदी अधिकार केन्द्र चल रहा है जहां प्रत्येक माह औसतन 15 से 25 मामलों का निवारण होता है. पीड़ित व शोषित महिलाओं को बेहतर सलाह भी दिये जाते हैं.प्रत्येक केन्द्र पर छह जेंडर सीआरपी व केन्द्र समन्वयक अपनी सेवाएं दे रहे हैं. महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में अहम पहल हो रही है.योजनाओं के प्रति उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है. चार प्रखंडों में नये केन्द्र खोलने के लिए भवन की तलाश केन्द्रों पर आ रहे अधिक मामलों को ध्यान में रखते हुए जिले के चार और प्रखंडों में अधिकार केन्द्र खोलने की प्रक्रिया चल रही है. घोड़ासहन,पकड़ीदयाल,मधुबन व तुरकौलिया में केन्द्र शीघ्र खोले जाएंगे. इसके लिए माकूल भवन की भी तलाश की जा रही है. भवन की व्यवस्था होते ही इस काम को अंजाम दिया जाएगा. विभागीय निर्देशों के अनुसार,आगे की प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा. दीदी अधिकार केंद्र के काम: -महिला हिंसा, घरेलू हिंसा, और जेंडर असमानता से जुड़े मामलों में सहायता -बाल विवाह को रोकना -लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना -महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ना -महिलाओं को कानूनी सहायता देना -महिलाओं को परामर्श देना -महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना दीदी अधिकार केंद्र की खास बातें: -इस केंद्र में महिलाएं बिना किसी डर अपनी समस्याएं साझा कर सकती हैं. -यह केंद्र, महिलाओं को उनके कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक करता है. -यह केंद्र, महिलाओं को विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से उनके अधिकारों तक पहुंच दिलाता है. -यह केंद्र, महिलाओं को काउंसलिंग की सुविधा भी देता है. कहते हैं अधिकारी- स्थानीय स्तर पर महिलाओं की बेहतर तरीके से काउंसलिं हो जाए और वे सरकारी योजनाओं से जुड़ें,इसके लिए विभागीय पहल जारी है. लैंगिक भेद-भाव से लेकर घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों का निवारण होता है. गणेश पासवान,डीपीएम,जिला परियोजना,मोतिहारी.

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Published by: Digvijay singh

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