Crocodiles In Bihar Villages: मोतिहारी जिले के विभिन्न इलाकों में हाल ही में मगरमच्छों के दिखने से हड़कंप मचा हुआ है. नेपाल के पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश के बाद गंडक, पसाह और हरहा जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है. बाढ़ और तेज बहाव के साथ मगरमच्छ मुख्य जलस्रोतों से भटककर रिहाइशी इलाकों, खेतों और गांवों का रुख कर रहे हैं. चटिया बड़हरवा, छौड़ादानो के परसा पैठानपट्टी, रामपुर और बंजरिया के गोबरी गांव में विशालकाय मगरमच्छ देखे गए हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. हालांकि प्रशासन और स्थानीय लोगों की सूझबूझ से उनका रेस्क्यू कर लिया गया है.
मवेशियों का शिकार और प्रजनन चक्र है मुख्य वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ के पानी से बाहर निकलने के बाद ये खतरनाक जीव मवेशियों और छोटे जानवरों के शिकार की तलाश में आबादी वाले इलाकों में दाखिल होते हैं. आमतौर पर मादा मगरमच्छ नदी के किनारे रेत या पत्तियों के घोंसले में 30 से 60 अंडे देती है. अंडों से बच्चे निकलने में 80 से 90 दिन का समय लगता है. दिलचस्प बात यह है कि घोंसले के तापमान से ही यह तय होता है कि बच्चा नर होगा या मादा. 31°C से कम तापमान पर मादा और 31°C से 32°C के बीच नर बच्चे का जन्म होता है.
डीएफओ अमित कुमार ने सेल्फी और रील्स न बनाने की दी सलाह
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने आम लोगों के लिए सतर्कता निर्देश जारी किए हैं. जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) अमित कुमार ने बताया कि मगरमच्छ अत्यंत खतरनाक जलीय जीव हैं. उन्होंने अपील की है कि मगरमच्छ दिखाई देने पर उसके नजदीक जाकर सेल्फी लेने या रील्स बनाने की भूल बिल्कुल न करें. ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें ताकि त्वरित कार्रवाई कर रेस्क्यू किया जा सके.
