मोतिहारी जिले में भवन निर्माण सेस (लेबर सेस) की शत-प्रतिशत वसूली के लिए श्रम संसाधन विभाग ने एक बड़ा और बेहद सख्त अभियान शुरू किया है. विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यावसायिक नए भवन के निर्माण पर नियमानुसार सेस राशि का भुगतान हर हाल में करना होगा. नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ विभाग अब सीधी कार्रवाई के मूड में आ गया है, जिसके तहत शुरुआती चरण में 10 बड़े डिफाल्टरों को आधिकारिक नोटिस थमा दिया गया है.
डिजिटल मैपिंग और निरीक्षण से पकड़े जा रहे डिफाल्टर
मामले की जानकारी देते हुए श्रम अधीक्षक सत्यप्रकाश ने बताया कि कई विकासकर्ता और भवन निर्माता बड़े-बड़े निर्माण कार्य शुरू करने के बावजूद तय सेस राशि जमा करने में आनाकानी कर रहे थे. इस लापरवाही से श्रमिकों के कल्याण कोष को भारी नुकसान पहुंच रहा था. अब विभाग ने डिजिटल मैपिंग और जमीनी निरीक्षण के जरिए ऐसे अवैध निर्माण कार्यों की पहचान तेज कर दी है. नोटिस पाने वाले 10 लोगों को तय समय सीमा के भीतर बकाया राशि जमा करने का आदेश दिया गया है. ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और निर्माण कार्य पर रोक लगाने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे.
क्या है सेस राशि और इसके नियम?
भारत में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम के तहत भवन निर्माण के लिए कुल निर्माण लागत का एक प्रतिशत (1%) लेबर सेस के रूप में निर्धारित है. इस राशि का भुगतान आधिकारिक वेबसाइट 'BOCW Board Bihar' पर 'Cess Payer' के रूप में पंजीकृत होकर ऑनलाइन किया जा सकता है. नए लेबर कोड नियमों के अनुसार, 50 लाख रुपये से कम लागत वाले निजी मकानों को इस उपकर से छूट दी गई है, जबकि सभी व्यावसायिक और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स पर यह अनिवार्य रूप से लागू रहता है.
मजदूरों के कल्याण में होता है इस राशि का उपयोग
श्रम अधीक्षक ने बताया कि सेस के माध्यम से एकत्रित की गई इस राशि का उपयोग निर्माण कार्य में लगे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के स्वास्थ्य, दुर्घटना बीमा, पेंशन और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है.
