Bagmati River Link Channel Project: दशकों से सूखी पड़ी बागमती नदी की पुरानी धारा रविवार को फिर से जीवंत होती नजर आई. बेलवा डैम से नियंत्रित तरीके से छोड़ा गया पानी तेतरिया प्रखंड के कदमा गांव तक पहुंचा, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे जुट गए. वर्षों बाद नदी में बहते पानी को देखकर किसानों और स्थानीय लोगों के चेहरे खिल उठे.
सूखी धारा में पानी पहुंचते ही जगी उम्मीद
बागमती नदी की पुरानी धारा में पानी पहुंचने के साथ ही इलाके में उत्साह का माहौल बन गया. लंबे समय से सिंचाई संकट झेल रहे किसानों को उम्मीद है कि परियोजना पूरी होने के बाद खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी.
कई ग्रामीणों ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक दिन बताया.
68.80 किलोमीटर लंबे लिंक चैनल का हुआ ट्रायल
बागमती नदी की पुरानी धारा को पुनर्जीवित करने के लिए बेलवा से मीनापुर तक 68.80 किलोमीटर लंबे लिंक चैनल का निर्माण कराया जा रहा है.
यह परियोजना शिवहर, पूर्वी चंपारण और मुजफ्फरपुर जिलों से होकर गुजरती है. इसका उद्देश्य बागमती की पुरानी धारा को फिर से सक्रिय करना और आगे चलकर पानी को बूढ़ी गंडक नदी तक पहुंचाना है.
परियोजना के तहत बेलवा से मीनापुर तक पुरानी धारा की खुदाई पूरी हो चुकी है.
सफल रहा पानी छोड़ने का ट्रायल
योजना के तहत पहली बार बेलवा डैम से नियंत्रित तरीके से पानी छोड़कर ट्रायल किया गया, जो सफल रहा. छोड़ा गया पानी तेतरिया क्षेत्र तक पहुंच गया, जिससे परियोजना के प्रभावी संचालन की उम्मीद और मजबूत हो गई है.
अधिकारियों के अनुसार भविष्य में बाढ़ या अधिक वर्षा के समय बागमती की मुख्य धारा का अतिरिक्त पानी इसी लिंक चैनल के जरिए पुरानी धारा में प्रवाहित किया जाएगा.
हजारों किसानों को मिलेगा लाभ
बागमती के पुराने मार्ग से हटने के बाद तेतरिया, पिपराही, शिवहर, डुमरी कटसरी, तरियानी और मीनापुर क्षेत्र के किसान वर्षों से सिंचाई संकट का सामना कर रहे थे.
परियोजना पूरी होने के बाद इन क्षेत्रों के हजारों किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी. इससे खेती की लागत कम होने के साथ कृषि उत्पादन बढ़ने की भी उम्मीद है.
139 करोड़ रुपये से बना हेड रेगुलेटर
परियोजना के तहत शिवहर के बेलवा घाट पर लगभग 139 करोड़ रुपये की लागत से हेड रेगुलेटर और स्लुइस गेट का निर्माण कराया गया है. इसी संरचना के माध्यम से नियंत्रित तरीके से पुरानी धारा में पानी छोड़ा जा रहा है.
अब स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि परियोजना पूरी तरह लागू होने के बाद क्षेत्र को स्थायी सिंचाई सुविधा और जल प्रबंधन का कितना लाभ मिल पाता है.
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