Motihari News: मोतिहारी के रक्सौल निवासी एक व्यक्ति से साइबर ठगों ने लोन दिलाने का झांसा देकर 58 लाख 15 हजार 715 रुपये 54 पैसे की ठगी कर ली. शिकायत के अनुसार ठगी की शुरुआत महज कुछ हजार रुपये की प्रोसेसिंग फीस से हुई, लेकिन इसके बाद टीडीएस पेपर, फाइल तैयार करने, सेल टैक्स, लेट फाइन और अप्रूवल चार्ज समेत अलग-अलग बहाने बनाकर रकम मांगी जाती रही. हर बार भुगतान के लिए नया बैंक खाता दिया गया. लोन मिलने की उम्मीद में पीड़ित रकम जुटाकर भुगतान करता रहा, लेकिन लोन की राशि कभी नहीं मिली.
Raxaul News: बैंक अधिकारी बनकर आया फोन, फिर शुरू हुआ फीस का खेल
शिकायतकर्ता पंकज कुमार ने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति ने फोन कर अपना नाम सुनील जामद बताते हुए खुद को बैंक अधिकारी बताया. उसने बड़ा लोन दिलाने का भरोसा दिया. बातचीत के दौरान विश्वास कायम होने के बाद आधार कार्ड और पैन कार्ड मांगा गया, जिसे पंकज ने व्हाट्सऐप के जरिए भेज दिया.
इसके बाद लोन प्रक्रिया के नाम पर उनसे अलग-अलग मद में रकम मांगने का सिलसिला शुरू हो गया.
4 हजार से शुरू हुई रकम की मांग
पंकज के अनुसार सबसे पहले उनसे 4 हजार रुपये प्रोसेसिंग फीस और 8,600 रुपये टीडीएस पेपर के नाम पर मांगे गए. रकम भेजने के बाद अगले दिन फाइल तैयार करने के नाम पर 12,999 रुपये की मांग की गई.
इसके बाद ठगों ने लोन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों का हवाला देकर लगातार भुगतान कराया.
हर पड़ाव पर नया चार्ज, हर बार नया बैंक खाता
शिकायत के अनुसार कथित ठगों ने कभी सेल टैक्स पेपर तो कभी लेट फाइन के नाम पर रकम मांगी. एक चरण में 18,999 रुपये मांगे गए. भुगतान में देरी होने पर 6,320 रुपये लेट फाइन जोड़ने की बात कही गई, जिसके बाद शिकायतकर्ता के अनुसार उनसे कुल 25,319 रुपये और लिए गए.
इसके बाद फाइल मैनेजर तक पहुंचने की बात कहकर अप्रूवल के लिए 28,999 रुपये मांगे गए. कुछ दिनों बाद फाइल जांच कमेटी में पहुंचने का हवाला देकर फिर 26,699 रुपये की मांग की गई.
व्हाट्सऐप पर स्टांप पेपर भेजकर बनाए रखा भरोसा
शिकायतकर्ता के अनुसार कथित ठगों ने फोन कॉल के साथ व्हाट्सऐप का भी इस्तेमाल किया. भरोसा कायम रखने के लिए उसे स्टांप पेपर भेजा गया और बताया गया कि भुगतान पूरा होते ही लोन की रकम मिल जाएगी.
इसी भरोसे में पंकज अलग-अलग मांगों पर रकम भेजते रहे. रकम बढ़ती गई, लेकिन लोन की राशि उनके खाते में नहीं पहुंची.
5 लाख से ज्यादा देने के बाद भी नहीं रुकी मांग
पंकज के अनुसार जब करीब 5 लाख रुपये तक रकम ट्रांसफर हो गई, तब भी उन्हें लोन जल्द मिलने का भरोसा दिया जाता रहा. लेकिन इसके बाद भी ठगों की मांग खत्म नहीं हुई.
अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन आते रहे और अलग-अलग बैंक खातों में रकम भेजने के लिए कहा जाता रहा. शिकायत में आकाश मिश्रा नाम से फोन करने वाले व्यक्ति का भी उल्लेख किया गया है.
58.15 लाख गंवाने के बाद साइबर ठगी का हुआ एहसास
शिकायत के अनुसार अलग-अलग तारीखों में पंकज से कुल 58,15,715.54 रुपये ट्रांसफर कराए गए. लगातार नई मांग आने और लोन की राशि नहीं मिलने के बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ.
इसके बाद उन्होंने साइबर थाना मोतिहारी में आवेदन देकर संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और लेनदेन की जांच कराने तथा आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
साइबर थाना पुलिस ने शुरू की जांच
साइबर इंस्पेक्टर राजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. पुलिस संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और लेनदेन की जांच कर रही है. जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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