MLC Deepak Prakash: बिहार की राजनीति से जुड़े एक बेहद अहम मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है. मामला पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर नियुक्ति से जुड़ा है. वरिष्ठ BJP नेता राजेश कुमार सिंह ने उनकी नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बिहार सरकार और दीपक प्रकाश, दोनों से जवाब मांगा था. अब सुनवाई से ठीक एक दिन पहले यानी 14 सितंबर को दीपक प्रकाश ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है. लेकिन बिहार सरकार की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है.
दीपक प्रकाश ने की याचिका रद्द करने की मांग
दीपक प्रकाश ने याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कहा है कि उनके मामले में संविधान का कोई उल्लंघन नहीं हुआ. अब वे एमएलसी बन गए हैं. संविधान के अनुच्छेद 164(4) के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है और उसे मंत्री बनाया जाता है, तो वह अधिकतम 6 महीने तक मंत्री रह सकता है. 6 महीने के अंदर उसे विधायिका का सदस्य बनना जरूरी होता है, वरना मंत्री पद छोड़ना पड़ता है.
कब-कब हुई दीपक प्रकाश की नियुक्ति?
दीपक प्रकाश की पहली नियुक्ति 22 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मंत्रिपरिषद में हुई थी. इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया. उनके इस्तीफे के साथ पूरी मंत्रिपरिषद भी खत्म हो गई. दीपक प्रकाश का दावा है कि उनका पहला कार्यकाल 6 महीने का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही समाप्त हो गया था.
फिर सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने और 7 मई 2026 को नई मंत्रिपरिषद में दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाया गया. यही दूसरा कार्यकाल विवाद की सबसे बड़ी वजह है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के S.R. Chaudhuri बनाम पंजाब, 2001 के फैसले का हवाला दिया है. इस फैसले में अदालत ने मंत्री पद के जरिए 6 महीने की संवैधानिक सीमा को दरकिनार करने की कोशिश को गंभीरता से देखा था.
लेकिन दीपक प्रकाश का तर्क बिल्कुल अलग है. उनका कहना है कि पंजाब का फैसला उनके मामले पर लागू नहीं होता, क्योंकि वहां एक ही मुख्यमंत्री की सरकार में इस्तीफा देकर तत्काल दोबारा नियुक्ति हुई थी. जबकि बिहार में पहली सरकार ही खत्म हो गई थी और बाद में नए मुख्यमंत्री और नई मंत्रिपरिषद ने उन्हें नियुक्त किया.
क्या होगा आज कोर्ट का फैसला?
मामले में एक और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब 5 अगस्त 2026 को राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया. इसके बाद उन्होंने शपथ ले ली. अब सुप्रीम कोर्ट को यह देखना है कि उनकी दूसरी नियुक्ति को पहली नियुक्ति की निरंतरता माना जाए या नई सरकार में हुई एक स्वतंत्र नियुक्ति. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि याचिका दाखिल होने के समय की स्थिति देखी जाए या मौजूदा स्थिति को आधार बनाया जाए.
