मधुबनी: विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर मलंगिया में सामुदायिक जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया. बैठक का उद्देश्य स्तनपान से जुड़ी आम भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर कर माताओं को वैज्ञानिक और सही जानकारी देना था. कार्यक्रम में पहली बार मां बनी महिलाओं, नवदंपतियों, स्तनपान कराने वाली माताओं, जीविका समूह की सदस्यों, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों सहित करीब 20 महिलाओं ने भाग लिया.
'घुट्टी या शहद नहीं, नवजात को दें मां का पहला दूध'
बैठक के दौरान महिलाओं ने नवजात को जन्म के बाद घुट्टी या शहद देने की परंपरा को लेकर सवाल पूछा. इस पर सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) ज्ञान चंद्र ठाकुर ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे को केवल मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) ही पिलाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह बच्चे की पहली प्राकृतिक वैक्सीन है, जो संक्रमण से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है.
छह माह तक पानी की भी जरूरत नहीं
गर्मी के मौसम में छोटे बच्चों को पानी देने को लेकर भी महिलाओं ने सवाल किए. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि जन्म से छह माह तक शिशु के लिए केवल मां का दूध ही पर्याप्त होता है. इसमें पानी समेत सभी जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, इसलिए अलग से पानी देने की आवश्यकता नहीं होती.
सर्दी-जुकाम होने पर भी जारी रखें स्तनपान
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि मां को सामान्य सर्दी-जुकाम है, तब भी वह बच्चे को स्तनपान करा सकती है. अधिकारियों ने बताया कि मां के दूध में मौजूद एंटीबॉडी बच्चे को संक्रमण से बचाने में मदद करती हैं और सामान्य सर्दी-जुकाम स्तनपान रोकने का कारण नहीं है.
पीला और पतला दूध भी होता है फायदेमंद
स्वास्थ्य अधिकारियों ने महिलाओं को बताया कि मां का हर प्रकार का दूध बच्चे के लिए लाभकारी होता है. जन्म के बाद आने वाला पीला दूध सबसे अधिक पौष्टिक होता है, जबकि पतला दिखाई देने वाला दूध भी शिशु की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता है.
दो साल या उससे अधिक समय तक कराएं स्तनपान
बैठक में यह भी बताया गया कि छह माह बाद बच्चे को पूरक आहार शुरू करना चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखना चाहिए. अधिकारियों ने कहा कि संतुलित आहार के साथ स्तनपान कराने से मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम होता है.
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