Bihar Health News: मधुबनी समेत बिहार के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब बोन मैरो ट्रांसप्लांट (अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण) के लिए मरीजों को लाखों रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे. राज्य सरकार ने इस इलाज के लिए सीएमसी वेल्लोर के साथ करार किया है. इसके तहत पात्र थैलेसीमिया मरीजों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट सरकारी खर्च पर कराया जाएगा. इससे उन बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अभी नियमित रूप से खून चढ़ाना पड़ता है.
थैलेसीमिया मरीजों को मिलेगा मुफ्त इलाज
सरकार और सीएमसी वेल्लोर के बीच हुए समझौते के बाद जिले के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट सरकारी खर्च पर होगा. इससे मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा. अब तक इस इलाज पर लाखों रुपये खर्च होने के कारण कई परिवार इसका लाभ नहीं ले पाते थे.
क्या है थैलेसीमिया?
सदर अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. कुणाल कौशल ने बताया कि थैलेसीमिया एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार है. इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को जीवनभर नियमित अंतराल पर खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है. बोन मैरो ट्रांसप्लांट इस बीमारी का स्थायी समाधान माना जाता है.
क्या होता है बोन मैरो ट्रांसप्लांट?
बोन मैरो ट्रांसप्लांट, जिसे स्टेम सेल प्रत्यारोपण भी कहा जाता है, एक ऐसी चिकित्सकीय प्रक्रिया है जिसमें क्षतिग्रस्त या रोगग्रस्त अस्थि मज्जा को स्वस्थ स्टेम कोशिकाओं से बदला जाता है. यह प्रक्रिया थैलेसीमिया के अलावा ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा और अन्य रक्त संबंधी गंभीर बीमारियों में भी की जाती है.
बोन मैरो ट्रांसप्लांट के दो प्रकार
ऑटोलॉगस ट्रांसप्लांट: इसमें मरीज की अपनी स्टेम कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है.
एलोजेनिक ट्रांसप्लांट: इसमें किसी उपयुक्त डोनर, जैसे भाई-बहन या अन्य दाता की स्टेम कोशिकाओं का इस्तेमाल किया जाता है. सफल प्रत्यारोपण के लिए डोनर का बोन मैरो मरीज से मैच होना जरूरी होता है.
मधुबनी में 60 थैलेसीमिया मरीज पंजीकृत
डॉ. कुणाल कौशल ने बताया कि सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में 60 थैलेसीमिया मरीज पंजीकृत हैं. इन सभी मरीजों को हर महीने दो से तीन यूनिट रक्त निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है. अब मुफ्त बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलने से ऐसे मरीजों के लिए स्थायी इलाज का रास्ता भी आसान हो सकेगा.
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