मधुबनी में दिव्यांग बच्चों के लिए खास पहल, 7 सितंबर से बनेंगे प्रमाण-पत्र और UDID कार्ड

मधुबनी के सभी प्रखंडों में दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष जांच शिविर लगाए जाएंगे. 7 सितंबर से 10 अक्टूबर तक होने वाले शिविरों में मेडिकल जांच के साथ दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

मधुबन दिव्यांग शिविर: जिले के दिव्यांग बच्चों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ने के लिए विशेष पहल शुरू की जा रही है. बिहार शिक्षा परियोजना के निर्देश पर जिले के सभी प्रखंडों में 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित होंगे. इन शिविरों में बच्चों की दिव्यांगता की जांच के साथ दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. शिविरों का आयोजन 7 सितंबर से 10 अक्टूबर तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा.

3 से 18 साल के बच्चों की होगी जांच

विशेष शिविरों में अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता वाले बच्चों की जांच की जाएगी. इसमें अस्थि दिव्यांगता, मानसिक दिव्यांगता और दृष्टि दिव्यांगता समेत अन्य प्रकार की दिव्यांगता वाले बच्चे शामिल होंगे. निर्धारित तिथियों पर संबंधित प्रखंडों में बच्चों की जांच कर आवश्यक प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों की पहचान सुनिश्चित करने के साथ उन्हें उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है. प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड बनने के बाद बच्चों को सरकारी सुविधाओं से जोड़ने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है.

स्वास्थ्य विभाग की रहेगी मेडिकल टीम

शिविरों में बच्चों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मेडिकल टीम की व्यवस्था की जाएगी. वहीं समाज कल्याण विभाग को यूडीआईडी कार्ड बनाने के लिए जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गयी है.

शिक्षा विभाग को शिविरों के लिए आवश्यक बुनियादी व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. इसमें शिविर स्थल, फर्नीचर, पेयजल, रजिस्ट्रेशन समेत अन्य व्यवस्थाएं शामिल हैं.

अधिकारियों को समन्वय से काम करने का निर्देश

जिला प्रशासन ने अभियान को सफल बनाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया है. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रखंडों में शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक पात्र बच्चों तक इसका लाभ पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है.

प्रशासन की इस पहल से उन बच्चों और उनके अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. पहचान संबंधी दस्तावेज मिलने से बच्चों को सरकारी योजनाओं, सुविधाओं और अधिकारों से जोड़ने की राह आसान होगी.

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By Awadesh kumar das

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