मधुबनी के आरके कॉलेज में शिक्षा-शास्त्र विभाग और फाउंडेशन फॉर आर्ट, कल्चर, एथिक्स एंड साइंस (फेसेस), पटना के संयुक्त तत्वावधान में 'थिएटर इन एजुकेशन' कार्यक्रम आयोजित हुआ. इस दौरान संग्रहालय शिक्षा पर आधारित देश के पहले इन्फोड्रामा 'यक्षिणी' का मंचन किया गया और बीएड विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की गई.
प्रतिनिधि, मधुबनी
Madhubani News: शहर के आरके कॉलेज के शिक्षा-शास्त्र विभाग एवं फाउंडेशन फॉर आर्ट, कल्चर, एथिक्स एंड साइंस (फेसेस), पटना के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में 'थिएटर इन एजुकेशन' कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम के तहत संग्रहालय शिक्षा एवं सार्वजनिक संग्रहालय विज्ञान पर आधारित भारत के प्रथम इन्फोड्रामा 'यक्षिणी' का सफल मंचन किया गया.
बीएड विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्यशाला
कार्यक्रम के दौरान बीएड प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की गई. इसमें छात्रों को नाट्य-शिक्षण, गतिविधि आधारित शिक्षण और पाठ्यक्रमानुकूल रंगमंचीय विधियों की जानकारी दी गई.
कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. अनिल कुमार मंडल, फेसेस के अकादमिक सलाहकार डॉ. प्रियदर्शी हर्षवर्धन, शिक्षा-शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. मृणाल कुमार झा तथा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ.
गुणवत्तापूर्ण शिक्षक निर्माण पर दिया जोर
प्राचार्य प्रो. डॉ. अनिल कुमार मंडल ने कहा कि शिक्षा-शास्त्र के विद्यार्थी भविष्य के शिक्षक और राष्ट्र के निर्माता हैं. इसलिए केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक प्रशिक्षण, सृजनात्मक गतिविधियां और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियां भी आवश्यक हैं. उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से महाविद्यालय में 'थिएटर इन एजुकेशन' कार्यक्रम आयोजित किया गया है.
कार्यशाला में आयोजन सचिव एवं नाट्य निर्देशक डॉ. सुनिता भारती सहित फेसेस के विशेषज्ञों ने शिक्षण में थिएटर के प्रभावी उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी.
'यक्षिणी' ने दीदारगंज चामरधारिणी का इतिहास किया जीवंत
डॉ. सुनिता भारती के निर्देशन में प्रस्तुत इन्फोड्रामा 'यक्षिणी' में बिहार संग्रहालय में संरक्षित राष्ट्रीय महत्व की मौर्यकालीन कलाकृति दीदारगंज चामरधारिणी की वर्ष 1917 में हुई खोज, उसके इतिहास, पुरातात्त्विक महत्व और पटना संग्रहालय तक की यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया. यह इस नाटक की दसवीं प्रस्तुति थी.
नाटक में निरंजन कुमार उपाध्याय, अवधेश्वर दास, शुभम कुमार, डॉ. प्रियदर्शी हर्षवर्धन, आदित्य कुमार मिश्र, निखिल कुमार, पंडित संतोष कुमार, पियूष आनंद, आलोक कुमार, अमित कुमार, मास्टर लक्ष्य और अनुभव लाल कर्ण ने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं. स्वयं डॉ. सुनिता भारती ने ग्रामीण धोबिन बुलकनी की भूमिका निभाकर दर्शकों को भावुक कर दिया.
कुलगीत की संगीतमय प्रस्तुति
कार्यक्रम में कुलगीत की संगीतमय प्रस्तुति के दौरान हेमंत कुमार झा ने हारमोनियम और सुमित कुमार ने तबले पर संगत की. डॉ. रूबी कुमारी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मृणाल कुमार झा ने किया.
