झंझारपुर में किसानों को मिला बैकयार्ड मुर्गी पालन का प्रशिक्षण, वैज्ञानिकों ने बताए सफल पालन के तरीके

बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय ने झंझारपुर के सैनी गांव में बैकयार्ड मुर्गी पालन पर क्षमता विकास प्रशिक्षण का आयोजन किया। वैज्ञानिकों ने किसानों को वनराजा और ग्रामप्रिया जैसी उन्नत नस्लों की जानकारी दी, जिससे ग्रामीण आय और पोषण सुरक्षा बढ़ाई जा सके।

Madhubani News: झंझारपुर के ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने और पोषण सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना एवं कृषि विज्ञान केंद्र, सुखेत की ओर से सैनी गांव में बैकयार्ड मुर्गी पालन पर क्षमता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में 50 किसानों एवं महिलाओं को वैज्ञानिकों ने उन्नत मुर्गी पालन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी.

वैज्ञानिकों ने बताए उन्नत मुर्गी पालन के फायदे

कार्यक्रम में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. रोहित कुमार जायसवाल तथा कृषि विज्ञान केंद्र, सुखेत के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. जगपाल और राहुल सिंह राजपूत ने प्रशिक्षण दिया. डॉ. पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि बैकयार्ड मुर्गी पालन की सफलता काफी हद तक नस्ल के चयन पर निर्भर करती है. उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित वनराजा और ग्रामप्रिया नस्ल को सबसे उपयुक्त बताया, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं और सालाना 160 से 180 अंडे देने की क्षमता रखती हैं.

शुरुआती देखभाल और टीकाकरण पर दिया जोर

डॉ. रोहित कुमार जायसवाल ने कहा कि चूजों के शुरुआती 4 से 5 सप्ताह सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान कृत्रिम गर्मी, संतुलित स्टार्टर फीड और समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है. उन्होंने रानीखेत और चेचक जैसी बीमारियों से बचाव के लिए 5वें या 7वें दिन टीका लगाने तथा नियमित कृमिनाशक दवा देने की सलाह दी.

सुरक्षित शेल्टर और बेहतर प्रबंधन की जानकारी

डॉ. जगपाल ने किसानों को बताया कि दिन में मुर्गियों को खुला छोड़ा जा सकता है, लेकिन रात में सुरक्षित एवं हवादार शेल्टर में रखना आवश्यक है. उन्होंने बांस, लकड़ी और फूस से कम लागत में सुरक्षित रात्रिकालीन शेड बनाने की जानकारी दी. साथ ही प्रति मुर्गी 1.5 से 2 वर्ग फुट जगह रखने की सलाह दी.

मुर्गी पालन से बढ़ेगी ग्रामीणों की आय

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक राहुल सिंह राजपूत ने कहा कि यह कार्यक्रम अनुसूचित जाति परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने बताया कि देसी एवं उन्नत नस्ल की मुर्गियों के अंडे और मांस की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे किसानों को पोल्ट्री फार्म की तुलना में अधिक मूल्य मिलता है और अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित होता है.


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लेखक के बारे में

Author: Sanjay Kumar

Published by: Purushottam Kumar

संजय कुमार प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. चौसा (मधेपुरा) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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