Madhubani Vegetable Price: जिले के बाजारों में प्याज और हरी सब्जियों की कीमतों में अचानक तेजी आ गयी है. प्याज का खुदरा भाव 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि बैंगन भी 45 से 55 रुपये किलो बिक रहा है. कीमतों में इस उछाल से आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया है.
10 दिन में प्याज 1200 रुपये क्विंटल तक महंगा
शहर के गिलेशन बाजार और बाटा चौक की मंडियों में प्याज के दाम पिछले एक सप्ताह में तेजी से बढ़े हैं. फुटकर बाजार में प्याज करीब 50 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि पांच किलो यानी एक पसेरी के लिए ग्राहकों को 240 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं.
रिलेशन मंडी के आलू-प्याज के थोक व्यवसायी मौसम पंजियार के अनुसार, प्याज का थोक भाव फिलहाल 4000 से 4200 रुपये प्रति क्विंटल है. करीब 10 दिन पहले यही प्याज 2800 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था.
उन्होंने बताया कि प्याज की आवक कम होने के कारण कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता.
मिथिला के पसंदीदा बैंगन के भी बढ़े दाम
प्याज के साथ बैंगन की कीमतों ने भी आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. मिथिला के घरों में बचका और चोखा जैसे पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाला बैंगन अब 45 से 55 रुपये किलो बिक रहा है.
व्यापारियों के अनुसार मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण स्थानीय स्तर पर बैंगन की फसल प्रभावित हुई है. इससे मंडियों में इसकी आवक कम हो गयी है. आवक घटने और मांग बनी रहने से खुदरा कीमतों में तेजी आयी है.
चीनी के बाद प्याज और बैंगन की महंगाई
रसोई के बजट पर पहले ही चीनी की बढ़ी कीमतों का असर है. अब प्याज और बैंगन महंगा होने से घरेलू खर्च और बढ़ गया है.
| सब्जी/सामग्री | पहले का भाव | वर्तमान भाव |
| प्याज | ₹30-35/kg | ₹50/kg |
| बैंगन | ₹20-25/kg | ₹45-55/kg |
| चीनी | ₹45-48/kg | ₹70/kg |
गृहिणियों ने कहा, सब्जी खरीदें या बच्चों की फीस भरें
गिलेशन बाजार में खरीदारी करने पहुंचीं गृहिणी सुनीता देवी ने कहा कि प्याज और आलू हर सब्जी के लिए जरूरी हैं. प्याज के 50 रुपये किलो पहुंचने और बैंगन के महंगे होने से घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है.
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बाद ग्राहकों ने सब्जियों की खरीदारी की मात्रा करीब आधी कर दी है. इससे कारोबार पर भी असर पड़ रहा है.
बाहरी आवक कम होने से बढ़ी कीमत
थोक कारोबारियों के अनुसार जिले में अधिकांश प्याज नासिक और अन्य राज्यों से आता है. उत्पादक क्षेत्रों में मौसम की खराबी और परिवहन लागत बढ़ने से इसकी आवक प्रभावित हुई है.
वहीं, कुछ स्थानीय लोगों ने बिचौलियों द्वारा जमाखोरी किये जाने की आशंका भी जतायी है. आम लोगों ने जिला प्रशासन से बाजार में मूल्य नियंत्रण और जांच अभियान चलाने की मांग की है.
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