Madhubani News : नाबलिग के साथ दुष्कर्म मामले में एक को 20 वर्ष का कारावास

बेनीपट्टी थाना क्षेत्र में करीब दो वर्ष पूर्व नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म मामले की जिला अपर सत्र न्यायालय सात सह विशेष न्यायालय पॉस्को के न्यायाधीश निरज कुमार त्यागी की न्यायालय में सजा के बिंदु पर शनिवार को सुनवाई हुई.

मधुबनी.

बेनीपट्टी थाना क्षेत्र में करीब दो वर्ष पूर्व नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म मामले की जिला अपर सत्र न्यायालय सात सह विशेष न्यायालय पॉस्को के न्यायाधीश निरज कुमार त्यागी की न्यायालय में सजा के बिंदु पर शनिवार को सुनवाई हुई. न्यायालय ने दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के ही करहारा निवासी सूरज सहनी को दफा 376 भादवि व चार पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष कारावास की सजा सुनायी. साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया. जुर्माने की राशि नहीं देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. सरकार की ओर से बहस करते हुए विशेष लोक अभियोजक मधुरानी व सूचक अधिवक्ता प्रभाकर सिंह ने आरोपी के लिए न्यायालय से कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी. वहीं, बचाव पक्ष से अधिवक्ता बोधकृष्ण झा ने बहस कर कम से कम सजा देने की मांग की थी.

क्या है मामला

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विशेष लोक अभियोजक के अनुसार घटना 28 जनवरी 2024 कि है. नाबालिग पीड़िता सात बजे शाम में घर के नजदीक कलमबाग में शौच के लिए गयी थी. वहां पहले से ही घात लगाकर आरोपी बैठा था. वह नाबालिग को देखते ही पकड़ लिया. इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया. इस दौरान पीड़िता के चिल्लाने पर मुंह बंद कर दिया था. पीड़िता की आवाज सुन दो ग्रामीणों वहां पहुंच गये. दोनों ग्रामीणों ने जब आरोपी को पकड़ना चाहा, तो आरोपी भाग गया. घटना की जानकारी पीड़िता ने अपने परिजनों को दी. इसके बाद पीड़िता के परिजन आरोपी के घर जाकर शिकायत की, लेकिन आरोपी के परिजन पीड़िता के साथ गयी उनके परिजनों से मारपीट करने लगा. मामले को लेकर पीड़िता के परिजन ने गांव में पंचायत भी बैठाया, लेकिन पंचायत के लिए बार – बार समय देने के बाद आरोपी नहीं पहुंचा. पीड़िता ने बेनीपट्टी थाना में 12 फरवरी 2024 को प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

पीड़िता को क्षतिपूर्ति देने का आदेशविशेष लोक अभियोजक ने कहा है कि न्यायालय ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए पीड़िता को चार लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकार को दिया है. न्यायालय ने कहा कि संवेदनशील मामलों में पीड़ितों के पुनर्वास और आर्थिक सहायता के लिए त्वरित क्षतिपूर्ति आवश्यक है, ताकि पीड़िता मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पूनः खड़ी हो सके. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि घटना से पीड़िता और उनके परिवार को गंभीर मानसिक व सामाजिक आघात पहुंचा है. इसलिए क्षतिपूर्ती के लिए पीड़िता को चार लाख रुपये देने का आदेश जारी करते हुए प्राधिकार को राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है .चार ामें आरोप पत्र 22 माह में सजाघटना के संबंध में पीड़िता ने 12 फरवरी 2024 को बेनीपट्टी थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. मामले के अनुसंधानकर्ता ने पूरे मामले का अनुसंधान कर चार महीने के अंदर 28 जून 2024 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया. न्यायालय ने मामले में संज्ञान लेकर आरोपी पर 6 अक्टूबर 2024 को आरोप गठन किया. इसके बाद न्यायालय में अभियोजन की ओर से आठ साक्षियों को न्यायालय में पेश किया. बयान के बाद न्यायालय ने 22 नवंबर को सजा सुनायी है.

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Author: GAJENDRA KUMAR

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