मधुबनी हाईटेक फिश पार्लर: मछली खाने के शौकीन लोगों के लिए अच्छी खबर है. अब जिंदा और ताजी मछली खरीदने के लिए अलग-अलग बाजारों में भटकने की जरूरत नहीं होगी. शहर में पहली बार मिल्क पार्लर की तर्ज पर दो आधुनिक फ्रेश कैच कियोस्क मत्स्य बिक्री केंद्र बनाए जाएंगे. यहां ग्राहक अपनी पसंद की जीवित मछली टैंक से चुन सकेंगे और मौके पर ही उसकी सफाई व कटिंग की सुविधा भी मिलेगी.
इन दो जगहों पर बनेंगे फिश पार्लर
मत्स्य विभाग ने शहर में आधुनिक मत्स्य बिक्री केंद्र के लिए दो स्थान चिह्नित किए हैं. पहला केंद्र जिला मॉडल अस्पताल के सामने स्थित तालाब के पूरब-उत्तर कोने पर और दूसरा तिलक चौक स्थित सरकारी पोखर भींडा में बनाया जाएगा. चयनित दोनों स्थल मत्स्य विभाग की जमीन पर हैं. विभाग ने चिह्नित स्थलों की सूची भेजकर यहां बिक्री केंद्र निर्माण की स्वीकृति दी है.
यह योजना राज्य सरकार के सात निश्चय पार्ट-3 के तहत प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है. इसका उद्देश्य लोगों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण ताजी मछली उपलब्ध कराने के साथ मत्स्य पालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है.
11 लाख रुपये की लागत से बनेगा प्रत्येक केंद्र
प्रत्येक आधुनिक मत्स्य बिक्री केंद्र के निर्माण पर करीब 11 लाख रुपये खर्च होंगे. इसकी अधिकतम लागत 13 लाख 20 हजार रुपये निर्धारित की गयी है. निर्माण में 80 प्रतिशत राशि सरकार अनुदान के रूप में देगी, जबकि 20 प्रतिशत राशि लाभार्थी को वहन करनी होगी. केंद्रों के संचालन के लिए लाभार्थियों का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा.
50 किलो का होगा जीवित मछली टैंक
जिला मत्स्य पदाधिकारी अंजनी कुमार के अनुसार, दोनों केंद्रों पर करीब 50 किलोग्राम क्षमता का जीवित मछली टैंक लगाया जाएगा. पारदर्शी ग्लास वाले टैंक में ग्राहक अपनी पसंद की मछली देखकर चुन सकेंगे. इसके बाद मछली की मौके पर ही सफाई और कटिंग कर दी जाएगी.
कोल्ड स्टोरेज से लेकर डिजिटल पेमेंट तक
फ्रेश कैच कियोस्क में छोटे कोल्ड स्टोरेज, डीप फ्रीजर और डिस्प्ले काउंटर की सुविधा होगी. इसके अलावा स्वच्छ जल, ड्रेनेज, बिजली और बैकअप, डिजिटल भुगतान, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था भी रहेगी. मछली से बने वैल्यू एडेड उत्पादों की बिक्री की सुविधा भी विकसित की जाएगी.
मत्स्य पालकों को मिलेगा बेहतर बाजार
विभाग का मानना है कि आधुनिक बिक्री केंद्र शुरू होने से उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर ताजी और स्वच्छ मछली मिलेगी. वहीं स्थानीय मत्स्य पालकों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार मिलेगा. इससे उनकी आय बढ़ने के साथ शहर में मछली कारोबार को भी नया बाजार मिलने की उम्मीद है.
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