Madhubani News: बिहार सरकार जहां सदर अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, वहीं मधुबनी मॉडल सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का आरोप लगाया है. परिजनों का कहना है कि अस्पताल में न तो सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और न ही समय पर जरूरी जांच की सुविधा मिल रही है. ऐसे में उन्हें दवा और जांच के लिए निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है.
डॉक्टरों के नियमित राउंड नहीं लगाने का आरोप
मेल मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि चिकित्सक नियमित रूप से वार्ड का राउंड नहीं लगाते हैं. कभी दोपहर तीन बजे तो कभी चार बजे मरीजों को देखने पहुंचते हैं. उनका आरोप है कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाओं में केवल 25 से 30 प्रतिशत दवाएं ही अस्पताल से मिलती हैं, जबकि बाकी महंगी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं.
जांच सुविधाओं का भी अभाव
परिजनों के अनुसार अस्पताल में भर्ती मरीजों को ब्लड जांच और ईसीजी जैसी आवश्यक जांच भी समय पर उपलब्ध नहीं हो रही हैं. इसके कारण मरीजों को निजी जांच केंद्रों में अतिरिक्त खर्च कर जांच करानी पड़ रही है.
परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों पर लगाए आरोप
मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर 24 घंटे में केवल एक बार ही वार्ड का राउंड करते हैं. चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का व्यवहार भी संतोषजनक नहीं है. उन्होंने कहा कि कई दिनों से वार्ड का पंखा खराब है, लेकिन उसे अब तक ठीक नहीं कराया गया है.
करहिया निवासी विवजी सिंह की परिजन गौरी देवी, पंडौल निवासी अमीन मिश्रा के परिजन संतोष मिश्रा, रैयाम निवासी राजकुमार पासवान, संतुनगर निवासी शमशुल हक तथा पौना निवासी भोगेंद्र कामत की परिजन देवकला देवी ने बताया कि इलाज के दौरान 70 से 75 प्रतिशत दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं.
सिविल सर्जन ने जांच का दिया आश्वासन
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि अस्पताल की डिस्पेंसरी में दवाओं के स्टॉक की नियमित समीक्षा की जाती है. यदि किसी कारण से मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि डिस्पेंसरी में आवश्यक दवाओं का स्टॉक जल्द सुव्यवस्थित किया जाएगा, ताकि किसी भी मरीज को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े.
