BRICS Summit 2026: BRICS शिखर सम्मेलन के अवसर पर नई दिल्ली के राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी में आयोजित ‘मिथिला की लोक परंपरा’ प्रदर्शनी में मधुबनी की कला और संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है. विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार अमृत राज ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया. उन्होंने मिथिला पेंटिंग की कलाकृतियों की बारीकियों को देखा और कलाकारों की कलात्मक अभिव्यक्ति की सराहना की.
मिथिला पेंटिंग वाले दुपट्टे से किया स्वागत
प्रदर्शनी के दौरान मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठ के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने विकास आयुक्त अमृत राज को मिथिला पेंटिंग वाला दुपट्टा भेंट कर स्वागत किया. दुपट्टे पर बनी पारंपरिक मिथिला चित्रकला को मिथिला की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया गया.
प्रदर्शनी के क्यूरेटर एवं संस्थान के कनीय आचार्य प्रतीक प्रभाकर ने विकास आयुक्त को प्रदर्शित कलाकृतियों की विषय-वस्तु, शैली और प्राकृतिक रंगों के प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
तंत्र चित्रकला की परंपरा की भी जानकारी
कनीय आचार्य संजय कुमार जायसवाल ने प्रदर्शनी में शामिल तंत्र चित्रकला की परंपरा और उससे जुड़ी कलाकृतियों के बारे में जानकारी दी. प्रदर्शनी में मिथिला की लोक परंपराओं के अलग-अलग रंग और स्वरूप को चित्रों के माध्यम से सामने रखा गया है.
यहां अरिपन, रामायण, कृष्ण लीला और राजा सलहेस की लोकगाथा के साथ समकालीन विषयों पर आधारित चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं. प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक विधि से तैयार की गई कलाकृतियां दर्शकों का खास ध्यान खींच रही हैं.
31 कलाकारों की 64 कलाकृतियां प्रदर्शित
‘मिथिला की लोक परंपरा’ प्रदर्शनी में कुल 31 कलाकारों की 64 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं. इसमें पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी और पद्मश्री शिवन पासवान जैसे चर्चित कलाकारों की कृतियां भी शामिल हैं.
इसके अलावा मिथिला चित्रकला संस्थान की आचार्य डॉ. रानी झा, कनीय आचार्य संजय कुमार जायसवाल, प्रतीक प्रभाकर और विद्यार्थियों की कलाकृतियों को भी प्रदर्शनी में जगह दी गई है.
मिथिला कला को पहचान दिलाने की पहल
यह प्रदर्शनी विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठ की ओर से आयोजित की गई है. आयोजन को मिथिला की लोक कला और परंपराओं को व्यापक स्तर पर सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
BRICS शिखर सम्मेलन के अवसर पर आयोजित इस प्रदर्शनी के जरिए मिथिला की पारंपरिक कला, लोकगाथाओं और चित्रकला की विविधता को नई दिल्ली में दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है. इससे मिथिला पेंटिंग को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है.
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