प्रतिनिधि, रहिका.
मैथिल समाज रहिका के तत्वावधान में 6 सूत्री मांगों के समर्थन में मैथिली समाज के सदस्यों ने प्रखंड कार्यालय पर अभयानंद झा ने नेतृत्व किया. धरना स्थल पर सभा को संबोधित करते हुए साहित्यकार उदयचंद्र झा विनोद ने कहा कि मिथिला की गौरवशाली, सांस्कृतिक धरोहर, अष्टम सूची में मैथिली भाषा को शामिल होने के पश्चात भी पिछले कई वर्षों से मैथिली अकादमी को निष्क्रिय बना दिया जाना मैथिली भाषा प्रेमी के साथ न्याय नहीं है. मैथिल समाज रहिका के सचिव शीतलांबर झा ने कहा कि वर्ष 1976 में स्वतंत्र स्वायत संस्था के रुप में मैथिली अकादमी की स्थापना सर्जनात्मक प्रकाशन, पत्रिका प्रकाशन, व्याख्यानमाला का आयोजन साहित्यिक इतिहास लेखन, भाषा संरक्षण, अनुसंधान व अन्वेषण, पांडुलिपि व धरोहर साहित्यकार व लेखक के प्रोत्साहन सहित अनेक क्षेत्र में काम करती रही है. लेकिन सरकार उपेक्षा पर उतारु है. उन्होंने कहा कि अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तक बिहार सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम के रुप में शामिल हैं. अकादमी अभी तक 213 पुस्तक का प्रकाशन कर चुकी है. जिसमें 9 पुस्तक को साहित्य अकादमी भी मिल चुका है. कृपानंद झा आजाद ने कहा कि मैथिली अकादमी को पूर्ण स्वरुप में सरकार लाये अन्यथा प्रदर्शन किया जाएगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
