छह लाख पेंशनधारकों को अलर्ट, नियम सबके लिए समान, मधुबनी प्रशासन का अल्टीमेटम

Pension KYC: मधुबनी प्रशासन ने सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारकों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है. तय समय तक केवाईसी नहीं कराने पर पेंशन सीधे बंद कर दी जाएगी. छह लाख से अधिक लाभार्थियों वाले जिले में पारदर्शिता के लिए आधार, आईरिस और फेस स्कैन से वार्षिक केवाईसी अनिवार्य की गई है.

Pension KYC: मधुबनी में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से जुड़े लाभार्थियों के लिए प्रशासन ने स्पष्ट संदेश जारी किया है. निर्धारित समय-सीमा के भीतर केवाईसी नहीं कराने वाले पेंशनधारकों की पेंशन सीधे बंद कर दी जाएगी. इस संबंध में किसी भी प्रकार की ढिलाई या बहाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पेंशन केवल वेरीफाइड और योग्य लाभार्थियों को ही दी जाएगी. केवाईसी कराना अनिवार्य है, ताकि फर्जी नामों, मृत लाभार्थियों और दोहरे भुगतान पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके. बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद जो पेंशनधारक जनवरी के अंत तक केवाईसी नहीं कराएंगे, उनकी पेंशन खुद रोक दी जाएगी.

जिला सामाजिक सुरक्षा विभाग के सहायक निदेशक नितेश कुमार पाठक ने कहा है कि पेंशन बंद होने के बाद यह कहना कि जानकारी नहीं थी, मान्य नहीं होगा. लाभार्थियों को अपने नजदीकी सीएससी, प्रखंड कार्यालय या अधिकृत केंद्र पर जाकर आधार आधारित केवाईसी शीघ्र पूरी करनी होगी.

प्रशासन का दो टूक कहना है-केवाईसी कराएं, तभी पेंशन पाएं. यह कदम पेंशन व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए उठाया गया है. सभी सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारकों से अपील है कि समय रहते केवाईसी पूरी कर लें, अन्यथा पेंशन बंद होने की पूरी जिम्मेदारी खुद लाभार्थी की होगी.

मधुबनी में छह लाख से अधिक सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारक

मधुबनी जिला सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिहाज से राज्य के बड़े जिलों में शामिल है. जिले में छह लाख से अधिक पेंशनधारक वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन योजना के अंतर्गत लाभ ले रहे हैं. यह आंकड़ा अपने-आप में बताता है कि पेंशन केवल योजना नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका और सम्मान का सहारा है.

प्रशासन का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए पेंशन व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्ती दोनों जरूरी हैं. इसी कारण अब केवाईसी को अनिवार्य किया गया है और स्पष्ट कर दिया गया है कि बिना केवाईसी के पेंशन नहीं मिलेगी. प्रशासन का साफ संदेश है- मधुबनी में छह लाख से अधिक पेंशनधारक हैं, इसलिए नियम सबके लिए बराबर हैं. समय पर केवाईसी कराएं, तभी पेंशन जारी रहेगी.

सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारकों साल में एक बार कराना होगा केवाईसी

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से जुड़े सभी लाभार्थियों को अब हर साल में एक बार केवाईसी कराना अनिवार्य होगा. इसका उद्देश्य पेंशन व्यवस्था को पारदर्शी रखना और केवल पात्र लाभार्थियों तक ही पेंशन पहुंचाना है. अधिकारियों के अनुसार वार्षिक केवाईसी से मृत, अपात्र या दोहरे नामों की पहचान आसान होगी और पेंशन राशि का दुरुपयोग रोका जा सकेगा.

इसके लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे बुजुर्ग और दिव्यांग पेंशनधारकों को भी किसी तरह की परेशानी न हो. पेंशनधारक अपना केवाईसी नजदीकी सीएससी सेंटर पर फ्री में करा सकते हैं. केवाईसी नहीं कराने की स्थिति में संबंधित लाभार्थी की पेंशन रोकी या बंद की जा सकती है.

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आईरिस और फेस स्कैन से भी होगा केवाईसी

अब पेंशन लाभार्थियों को केवाईसी कराने के लिए बार-बार कागजात या लंबी कतारों की परेशानी नहीं झेलनी होगी. सरकार ने केवाईसी प्रक्रिया को और अधिक सरल व सुरक्षित बनाते हुए आईरिस (आंखों की पुतली) और फेस स्कैन की सुविधा शुरू की है.

इस नई व्यवस्था के तहत बुजुर्ग, दिव्यांग और अस्वस्थ पेंशनधारी अब आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से आसानी से केवाईसी करा सकेंगे. जिन लोगों के फिंगरप्रिंट स्पष्ट नहीं आते थे, उनके लिए यह सुविधा विशेष रूप से वरदान साबित होगी.

तकनीक आधारित इस पहल से न सिर्फ फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, बल्कि सही लाभार्थी को समय पर पेंशन मिलना भी सुनिश्चित होगा. आईरिस और फेस स्कैन के जरिए पहचान सत्यापन अधिक सटीक और सुरक्षित होगा, जिससे पेंशन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी.

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Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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