मधुबनी से डॉ शैलेन्द्र कुमार झा की रिपोर्ट
Madhubani News: मिथिलांचल की सांस्कृतिक नगरी मधुबनी और इसके ग्रामीण इलाकों में शनिवार को पारंपरिक लोक पर्व वटसावित्री बेहद सादगी, निष्ठा और उत्सवी माहौल के बीच मनाया गया. सुबह होते ही सुहागिन महिलाएं और नवविवाहिताएं स्नान के बाद नए वस्त्र और आभूषण धारण कर पूजा की तैयारियों में जुट गईं. मिथिला की परंपरा के अनुसार, वटसावित्री का यह पावन पर्व खासकर नवविवाहिताओं के लिए बेहद खास और उल्लास से भरा रहा.
नवविवाहिताओं के लिए बेहद खास रही पूजा
मिथिलांचल में शादी के पहले साल पड़ने वाली वटसावित्री पूजा का एक अलग ही महत्व होता है. नवविवाहिताओं ने अपने ससुराल से विशेष रूप से आए नए वस्त्र और पारंपरिक आभूषणों को धारण कर दिनभर का निर्जला व्रत रखा. इसके बाद उन्होंने वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की छांव में बैठकर पूरे विधि-विधान से पूजा की, सूत लपेटा और अपने पति की लंबी आयु व सुखी जीवन के लिए प्रार्थना की. पूजा के अंत में महिलाओं ने सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा सुनी और अपना व्रत संपन्न किया.
अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि की मंगलकामना
दूसरी ओर, जिले की अन्य सुहागिन महिलाओं ने भी पूरी श्रद्धा के साथ दिनभर व्रत रखकर जगह-जगह वट वृक्ष की पूजा की. सदियों से मनाए जा रहे इस लोक पर्व को लेकर मान्यता है कि जो भी महिला पूरी निष्ठा से बरगद के पेड़ की पूजा करती है, उसे अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
प्रसाद का हुआ वितरण
पर्व के शांतिपूर्ण समापन के बाद सुहागिन महिलाओं ने आपस में खीर, मौसमी फल और मिठाइयों का प्रसाद बांटकर एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी.
