Madhubani News: बिहार सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय (योजना एवं विकास विभाग) ने राज्य भर में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के पंजीकरण और पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है. मधुबनी सहित सभी जिलों के जिला पदाधिकारियों और जिला रजिस्ट्रारों को जारी दिशा-निर्देशों में फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई है. अब सीआरएस (CRS) रिवैम्पड पोर्टल पर मौजूद सभी संदेहास्पद और असामान्य रजिस्ट्रेशन की बारीकी से जांच की जाएगी.
इस नए नियम के तहत लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट पर सीधी कानूनी कार्रवाई की गाज गिरना तय है.
लॉगिन आईडी और ओटीपी के दुरुपयोग की आई शिकायत, दिल्ली मुख्यालय ने लिया संज्ञान
निदेशक-सह-मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु) रणजीत कुमार द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, भारत के महापंजीयक कार्यालय, नई दिल्ली के ध्यान में कुछ गंभीर विसंगतियां आई हैं. देश और राज्य के कुछ हिस्सों में कतिपय व्यक्तियों द्वारा वैध लॉगिन आईडी, पासवर्ड और ओटीपी (OTP) का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं. इसके अलावा, पुराने कागजी प्रमाण पत्रों को डिजिटल स्वरूप देने (डिजिटाइजेशन) की आड़ में भी व्यापक गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें प्राप्त हुई हैं.
सुरक्षा के कड़े नियम: केवल अधिकृत नंबर होंगे दर्ज, पासवर्ड बदलना अनिवार्य
दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने डेटा सिक्योरिटी को मजबूत करने के निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
- अधिकृत क्रेडेंशियल्स: सीआरएस पोर्टल पर केवल संबंधित अधिकृत पदाधिकारियों का ही चालू मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी दर्ज होना चाहिए.
- नो-शेयरिंग पॉलिसी: कोई भी अधिकृत उपयोगकर्ता (User) अपनी लॉगिन आईडी, पासवर्ड या ओटीपी किसी भी बाहरी या अनधिकृत व्यक्ति के साथ साझा नहीं करेगा.
- नियमित अपडेट: सुरक्षा के लिहाज से सभी संबंधित अधिकारियों और डेटा ऑपरेटरों को समय-समय पर अपना पासवर्ड बदलने की सख्त सलाह दी गई है.
- प्रोफाइल वेरिफिकेशन: जिला रजिस्ट्रार, उप-रजिस्ट्रार और स्थानीय पंजीकरण इकाइयों को निर्देश है कि वे अपने-अपने प्रोफाइल की नियमित रूप से जांच और सत्यापन करते रहें ताकि पोर्टल के अनाधिकृत उपयोग को रोका जा सके.
डिजिटाइजेशन की नई प्रक्रिया: बिना भौतिक मिलान के पोर्टल पर नहीं होगी एंट्री
पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अब एक नया कड़ा प्रोटोकॉल लागू किया गया है जिसे नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
| डिजिटाइजेशन चरण | प्रशासनिक कार्य और नियम |
|---|---|
| चरण 1: भौतिक सत्यापन | सबसे पहले आवेदक से मूल प्रमाण पत्र प्राप्त कर उसमें दर्ज विवरणों का वास्तविक जन्म-मृत्यु रजिस्टर से मिलान किया जाएगा. |
| चरण 2: प्रमाणन (Certification) | मिलान पूरी तरह सही पाए जाने पर अधिकारी द्वारा मूल दस्तावेज पर ‘Checked & Verified’ अंकित किया जाएगा. |
| चरण 3: हस्ताक्षर व तिथि | जांचकर्ता अधिकारी अपने हस्ताक्षर और तारीख दर्ज करेंगे, जिसके बाद ही उसे पोर्टल पर डिजिटाइज करने की अनुमति मिलेगी. |
| चरण 4: साप्ताहिक व मासिक ट्रैकिंग | सभी पंजीकरण इकाइयों में जारी होने वाले प्रमाण पत्रों की संख्या की समीक्षा होगी. असामान्य वृद्धि दिखने पर तुरंत ऑडिट होगा. |
मुख्य रजिस्ट्रार की सख्त चेतावनी: जांच या नियमित समीक्षा के दौरान यदि किसी भी स्तर पर जन्म-मृत्यु पंजीकरण या पुराने प्रमाण पत्रों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया में गड़बड़ी, फर्जीवाड़ा या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित फर्जी प्रमाण पत्र को बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से रद्द (Cancel) कर दिया जाएगा. इसके साथ ही, इस धोखाधड़ी में शामिल दोषी अधिकारियों, कर्मियों या बाहरी व्यक्तियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
मधुबनी से कार्तिक कुमार की रिपोर्ट
