मधुबनी: मिथिला की समृद्ध चित्रकला परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने और कला के निरंतर विकास की दिशा में शुक्रवार को मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठ में ‘बैचलर इन मिथिला फोक पेंटिंग’ के नए सत्र का शुभारंभ हुआ. इस अवसर पर कला, साहित्य, इतिहास, नाट्य और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित विद्वानों, कलाकारों और शिक्षाविदों ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया.
कार्यक्रम में मिथिला की कला परंपरा और इसके संरक्षण तथा नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के महत्व पर मार्गदर्शन दिया गया. नए सत्र की शुरुआत के अवसर पर संस्थान परिसर में कला एवं संस्कृति से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे.
पद्मश्री कलाकारों समेत कई विद्वान हुए शामिल
कार्यक्रम में नाट्य क्षेत्र के प्रसिद्ध विद्वान महेंद्र मलंगिया, इतिहासकार नरेंद्र नारायण सिंह ‘निराला’, पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री शिवन पासवान, पद्मश्री दुलारी देवी, इतिहास विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. इंदिरा झा और साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त अजीत आजाद शामिल हुए.
इनके अलावा संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-उपनिदेशक, मिथिला चित्रकला संस्थान नीतीश कुमार, कनिय आचार्य डॉ. रानी झा, संजय कुमार जायसवाल, प्रतीक प्रभाकर, लेखा पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद यादव और सौराठ की बसंती मिश्रा भी मौजूद रहीं.
विद्यार्थियों को कला और संस्कृति के क्षेत्र में मार्गदर्शन
कार्यक्रम में मिथिला चित्रकला के अनेक कलाकारों के साथ संस्थान के शिक्षक और कर्मी भी उपस्थित रहे. नवप्रवेशित विद्यार्थियों को कला, साहित्य, इतिहास, नाट्य और संस्कृति से जुड़े अतिथियों के अनुभव और मार्गदर्शन का अवसर मिला.
मंच का संचालन श्री आनंद मोहन झा ने किया.
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